🤱 यशोदा जयंती: वात्सल्य और ममता का महापर्व 🚩
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को 'यशोदा जयंती' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उस महान माता को समर्पित है, जिनके प्रेम और ममता के वश में होकर स्वयं ब्रह्मांड के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण भी "लल्ला" बन गए।
✨ माता यशोदा का प्राकट्य:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता यशोदा का जन्म ब्रज के सुमुख गोप और माता पाटला के यहाँ हुआ था। यद्यपि श्रीहरि ने देवकी की कोख से जन्म लिया, परंतु भगवान को बाल-लीलाओं का आनंद और ममत्व की छाया माता यशोदा के आँचल में ही प्राप्त हुई।
🔱 पर्व का महत्व:
संतान सुख: आज के दिन माताएँ अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं।
अटूट प्रेम: यह दिन सिखाता है कि पालन-पोषण करने वाली माता का स्थान जन्म देने वाली माता के समान ही पूजनीय और ऊँचा होता है।
🙏 पूजन विधि:
आज के दिन घर के मंदिर में माता यशोदा की गोद में बैठे बाल कृष्ण के चित्र या विग्रह का पूजन करें। उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाएँ और 'यशोदा मैया' का ध्यान करें।
"मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो..."
जिनके प्रेम के आगे भगवान भी नतमस्तक हो गए, ऐसी ममतामयी माँ यशोदा को कोटि-कोटि नमन।
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