mahabharat

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Sangram Jadhav
777 views 23 days ago
🕉️ Bhagavad Gita Chapter 1 | Shloka 2 🕉️ पांडवांची शक्तिशाली आणि सुसज्ज सेना पाहून दुर्योधन चिंतेत का पडला? Duryodhan Was Worried? या श्लोकात दुर्योधनाची मानसिकता, त्याची चिंता आणि युद्धाच्या सुरुवातीची परिस्थिती स्पष्ट होते. ⚔️📖 #🙏🦚जय श्री कृष्णा🙏🦚 #mahabharat अहंकार असला तरी मनात भीती निर्माण होऊ शकते, हा या श्लोकाचा महत्त्वाचा संदेश आहे. 🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏 #BhagavadGita #Gita #Shloka2 #Krishna #Mahabharat #Duryodhan #Dronacharya #SanatanDharma #KrishnaBhakti #GitaWisdom #Bhakti #Spirituality #JayShriKrishna #YouTubeShorts #Shorts #TrendingShorts #Hinduism #Geeta #Kurushetra #Devotional
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sn vyas
526 views 10 hours ago
#महाभारत #महाभारत की कथा महाभारत के युद्ध पश्चात जब "श्री कृष्ण" लौटे तो रोष में भरी रुक्मणी" ने उनसे पूछा ?? युद्ध में बाकी सब तो ठीक था। किंतु आपने "द्रोणाचार्य" और "भीष्म पितामह" जैसे धर्मपरायण लोगों के वध में क्यों साथ दिया ?? "श्री कृष्ण" ने उत्तर दिया। ये सही है की उन दोनों ने जीवन भर धर्म का पालन किया। किन्तु उनके किये एक "पाप" ने उनके सारे "पुण्यों" को नष्ट कर दिया। वो कौन से पाप थे ?? जब भरी सभा में "द्रोपदी" का चीरहरण हो रहा था। तब यह दोनों भी वहां उपस्थित थे। बड़े होने के नाते ये दुशासन को रोक भी सकते थे। किंतु इन्होंने ऐसा नहीं किया। उनके इस एक पाप से बाकी सभी धर्मनिष्ठता छोटी पड़ गई। और "कर्ण" वो तो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था। कोई उसके द्वार से कोई खाली हाथ नहीं गया। उसके मृत्यु मे आपने क्यों सहयोग किया। उसकी क्या गलती थी ?? हे प्रिये! तुम सत्य कह रही हो। वह अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था और उसने कभी किसी को ना नहीं कहा। किन्तु जब अभिमन्यु सभी युद्धवीरों को धूल चटाने के बाद युद्धक्षेत्र में घायल हुआ भूमि पर पड़ा था। तो उसने कर्ण से पानी मांगा कर्ण जहां खड़ा था उसके पास पानी का एक गड्ढा था। किंतु कर्ण ने मरते हुए अभिमन्यु को पानी नहीं दिया। इसलिये उसका जीवन भर दानवीरता से कमाया हुआ "पुण्य" नष्ट हो गया। बाद में उसी गड्ढे में उसके रथ का पहिया फंस गया और वो मारा गया। हे रुक्मणी! अक्सर ऐसा होता है। जब मनुष्य के आसपास कुछ गलत हो रहा होता है और वे कुछ नहीं करते। वे सोचते हैं की इस "पाप" के भागी हम नहीं हैं। अगर वे मदद करने की स्थिति में नही हैं तो सत्य बात बोल तो सकते हैं कि वह कुछ नहीं कर सकते। वह मदद करने की स्थिति में नहीं हैं। परंतु वे ऐसा भी नही करते। ऐसा ना करने से वे भी उस "पाप" के उतने ही हिस्सेदार हो जाते हैं। जितना "पाप" करने वाला होता है।
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