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shineypositivevibes
1K views 1 months ago AI indicator
महत्व: अपरा एकादशी को 'अपार' पुण्य देने वाली माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु (त्रिविक्रम रूप) की पूजा करने से ब्रह्महत्या, भूत-प्रेत और निंदा जैसे पापों से मुक्ति मिलती है। #vishnu #hindu
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Pradeep Singh
770 views 19 days ago
💔🔥 “जिसे अर्जुन सबसे बड़ा भक्त समझते थे… वही भगवान को सबसे ज़्यादा कष्ट देने वाला निकला!” 😳⚔️ “कभी-कभी भगवान के सबसे करीब होने का घमंड… इंसान को सबसे दूर कर देता है!” 🕉️👑 “भक्ति में नाम बड़ा नहीं होता… त्याग और प्रेम बड़ा होता है!” =========>>>>>> प्रभु श्रीकृष्ण के सबसे बड़े भक्त एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी इस भावना को भगवान श्रीकृष्ण ने समझ लिया। अर्जुन का अहंकार तोड़ने के लिए एक दिन भगवान उन्हें अपने साथ घुमाने ले गए। भ्रमण करते समय उन दोनों की मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उस ब्राह्मण का व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से एक तलवार लटक रही थी। अर्जुन हैरान हो गया। उसने उस ब्राह्मण से पूछा, “आप तो अहिंसा के पुजारी हैं। जीव हिंसा न हो, इसलिए सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते हैं। लेकिन फिर हिंसा का यह साधन तलवार आपके साथ क्यों है?” यह प्रश्न सुन कर ब्राह्मण ने जवाब दिया, “मैं कुछ लोगों को दंड देना चाहता हूँ।” अर्जुन ने उत्सुक होकर फिर प्रश्न किया, “हे महाभाग! आपके शत्रु कौन हैं?” ब्राह्मण ने उत्तर दिया, “मैं चार लोगों को ढूंढ रहा हूँ, जिन्होंने मेरे भगवान को परेशान किया है, ताकि उन्हें उनके कर्मों का दंड दे सकूं।” अर्जुन ने फिर पूछा, “वे चार लोग कौन हैं?” ब्राह्मण ने कहा, “सबसे पहले तो मुझे नारद की तलाश है। नारद मेरे प्रभु को विश्राम नहीं करने देते, हमेशा भजन-कीर्तन करके उन्हें जगाए रखते हैं। उसके बाद मैं द्रौपदी से भी अत्यंत नाराज हूँ। उसने मेरे प्रभु को ठीक उसी समय पुकार लिया, जब वह भोजन करने बैठे थे। उन्हें उसी समय भोजन छोड़कर उठना पड़ा, ताकि पांडवों को महर्षि दुर्वासा ऋषि के श्राप से बचा सकें। इतना ही नहीं, द्रौपदी ने मेरे आराध्य को जूठा भोजन खिलवा दिया।” “आपका तीसरा शत्रु कौन है?” अर्जुन ने पूछा। ब्राह्मण ने उत्तर दिया, “वह है हस्तक्षेप प्रह्लाद। उस दुष्ट के कारण मेरे भगवान को गरम तेल के कड़ाहे में प्रवेश करना पड़ा, हाथी के पैरों तले कुचलना पड़ा और अंत में खंभे से प्रकट होने के लिए विवश होना पड़ा।” “और मेरा चौथा शत्रु है अर्जुन। उसका दुस्साहस तो देखिए, उसने तो मेरे भगवान को अपना सारथी ही बना डाला। उसे भगवान की असुविधा का थोड़ा भी ध्यान नहीं रहा। इससे कितना कष्ट हुआ होगा मेरे आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को!” यह सब बताते-बताते उस गरीब ब्राह्मण की आँखों से आँसू बहने लगे। उस गरीब ब्राह्मण की ऐसी निस्वार्थ भक्ति देखकर अर्जुन का सारा अहंकार पानी की तरह बह गया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगते हुए कहा, “मेरी आँखें खुल गई प्रभु, इस जगत में न जाने आपके कैसे-कैसे अद्भुत भक्त हैं। मैं तो उनके आगे कुछ भी नहीं हूँ।” =====>>> 🙏✨ #ShriKrishna #Bhakti #KrishnaBhakt #SanatanDharma #Hinduism #Spirituality #Motivation #LifeLessons #Karma #ViralStory 🌼🕉️ कभी-कभी सबसे बड़ा भक्त वही होता है… जिसे दुनिया पहचान भी नहीं पाती। अहंकार टूटते ही अर्जुन को समझ आया कि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, भगवान के दर्द को अपना दर्द मानने से होती है। 💔 “भगवान के सबसे करीब होने का घमंड… कहीं आपको उनसे दूर तो नहीं कर रहा?” ❓ क्या सच्ची भक्ति में अधिकार बड़ा होता है या समर्पण? 📊🙏 क्या अर्जुन का अहंकार टूटना जरूरी था? 🔹 हाँ, तभी सच्ची भक्ति समझ आई 🌸 🔹 नहीं, अर्जुन पहले से महान थे ⚔️ 🔹 सच्चा भक्त वही जो निस्वार्थ हो 🕉️ 🔹 भगवान सबकी भक्ति अलग तरह से स्वीकारते हैं 💖 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #hindu
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Pradeep Singh
1K views 13 days ago
😌✨ “परम सुख” बाहर की चीज़ों में नहीं… सोच के अंदर छिपा होता है। 💔 कुछ लोग सब कुछ पाकर भी दुखी हैं… और कुछ खाली हाथ होकर भी शांत हैं। 🕊️ जिस दिन इंसान अपनी सोच बदल लेता है, उसी दिन उसकी दुनिया बदल जाती है। =========>>>>>> “परम सुख” दुःख में सुख खोज लेना, हानि में लाभ खोज लेना, प्रतिकूलताओं में भी अवसर खोज लेना इस सबको सकारात्मक दृष्टिकोण कहा जाता है। जीवन का ऐसा कोई बड़े से बड़ा दुःख नहीं जिससे सुख की परछाइयों को ना देखा जा सके। जिन्दगी की ऐसी कोई बाधा नहीं जिससे कुछ प्रेरणा ना ली जा सके। रास्ते में पड़े हुए पत्थर को आप मार्ग की बाधा भी मान सकते हैं और बनाकर ऊपर भी चढ़ सकते हैं। जीवन का आनन्द वही लोग उठा पाते हैं जिनका सोचने का ढंग सकारात्मक होता है। इस दुनिया में बहुत लोग इसलिए दुःखी नहीं कि उन्हें किसी चीज़ की कमी है किन्तु इसलिए दुःखी हैं कि उनके सोचने का ढंग नकारात्मक है। सकारात्मक सोचो, सकारात्मक देखो। इससे आपको अभाव में भी जीने का आनन्द आ जायेगा। अगर आपकी खुशी की एकमात्र वजह ये है कि जो चीज़ आपके पास हैं, वो दूसरों के पास नहीं, तो इसे विचार कहेंगे। इस तरह के विकार से जितनी जल्दी छुटकारा पा लिया जाये उतना बढ़िया। इससे मिलने वाली प्रसन्नता क्षणिक होती हैं। नुकसान ज्यादा होता है और उसके बारे में पता बाद में चलता है। बातें चाहे कितनी बड़ी बड़ी की जाए, कितनी ही अच्छी ही क्यों न हो किन्तु याद रखिये संसार आपको आपके कर्मों के द्वारा जानता है। अतः बातें भी अच्छी करिए और कार्य भी हमेशा उत्कृष्ट और श्रेष्ठ करें। =====>>> ✨🌿 #PositiveThinking 🚩 #KrishnaQuotes 💫 #MotivationalStory 🕉️ #SpiritualGrowth 🔥 #LifeChangingThoughts 🌸 #HinduWisdom 📖 #SuccessMindset 💖 #InnerPeace 🚀 #SelfGrowth 🪔 #InspirationalQuotes 💖 जो इंसान हर हाल में सुख ढूंढना सीख जाता है, वही जीवन का असली आनंद पाता है। 🌿 परम सुख बाहर नहीं… आपकी सोच और कर्मों के भीतर छिपा है। 🔥 “कुछ लोग महलों में भी दुखी हैं…” 😌 “और कुछ लोग मुश्किलों में भी शांत हैं…” आपके हिसाब से असली सुख इंसान को कहाँ मिलता है? 📊✨ Poll Time ✨📊 ❓ “परम सुख” किसमें छिपा है? 🔹 😊 सकारात्मक सोच में 🔹 💰 धन और सफलता में 🔹 🕊️ मन की शांति में 🔹 🙏 भगवान की भक्ति में #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #hindu
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