#पवित्र उपवास
उपवास:---
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सप्ताह में कम से कम एक दिन का उपवास रखें और यदि सप्ताह में एक दिन का आप उपवास नहीं रख सकते तो १५ दिन में एक उपवास रख ही लें --
उपवास रखने से हमारे शरीर की जठराग्नि को जब भोजन नहीं मिलता तो जठराग्नि आंतों के भीतर के सडे अन्न को पचाने लगती है, और जब वह अन्न भी पच जाता है, तब वही जठराग्नि आंतों के भीतर के मृतक और बीमारु कोशिकाओं को खाने लगती है, और शरीर में नयी कोशिकाएं बनती है!
उपवास करने की सही विधी --
बताई गयी विधी से ही उपवास करें तभी आपको उपवास का १००% लाभ मिलेगा !
१--उपवास रखने से ठीक एक दिन पहले सांयकाल में हल्का भोजन करें, मूंग की दाल या जौ का दलिया अथवा, तौरी, लौंकी अथवा हल्की पचने योग्य वस्तु का सेवन करें !
२-- उपवास से एक दिन पहले सांयकाल में अपने मस्तिष्क को और अपने मन को उपवास रखने के लिए पहले से तैयार कर लें।
३-- प्रातः काल बिस्तर से उठने से पहले यह निश्चित कर लें कि आज आपका उपवास है!
४-- प्रातः काल उठते ही शरीर के तापमान के अनुकूल एक गिलास जल पी लें अथवा तीन अंजलि भर के जल पी लें।
५-- उपवास के समय दिनभर कुछ भी नहीं खाना है, ना ही कोई फल और ना ही किसी प्रकार की चाय और ना ही काफी का सेवन करना है।
६-- उपवास के समय दोपहर में एक गिलास जल पीएं और सांयकाल सूर्यास्त से पूर्व भी एक गिलास जल पीएं या तीन अंजलि भर के जल पीएं!
७-- उपवास के दिन कम से कम बोलें और अधिक परिश्रम का कार्य ना करें!
८-- उपवास में मानसिक जप करें और अपने इष्ट या कुलदेवता का ध्यान करें!
९-- रात्रि सूर्यास्त के समय पूजा अर्चना या उपासना करने के पश्चात् बिल्कुल हल्का भोजन करें जो दो- तीन घंटे में पच जाए और अधिक भोजन ना करें तथा भोजन में नमक ना हो।
यह उपवास जनसाधारण के लिए है!
इसके अतिरिक्त कुछ उपवास चंद्रमा के दर्शन के पश्चात् खोले जाते हैं।
१०-- जो लोग शरीर से कमजोर अथवा बीमार हैं, वे उपवास में अनार का जूस और नारियल पानी तथा पपीते का सेवन करें!
११-- जो लोग सक्षम हैं वे उपवास के दिन रात्रि में सूर्यास्त के पश्चात् पपीते का सेवन या जौ का दलिया का सेवन करके सो जाएं और उपवास को अगले दिन १२ बजे हल्के भोजन के साथ खोलें।
१२-- उपवास की समाप्ति पर कभी भी मोटी दालें अथवा बासी अनाज अथवा चटपटी और तेल तथा मसालेदार भोजन ना करें अपितु मूंग की दाल, जौ का दलिया, लौंकी, तौरी, और हल्की सब्जी या खिचड़ी के साथ उपवास की समाप्ति करें!
उपवास में किसी भी प्रकार का फल और अन्न वर्जित है।
किंतु जो लोग उपवास में फल खाना चाहते हैं उनके लिए पपीता और केला सर्वोत्तम आहार है।
आम- संतरा- जूस भी उपवास में लिया जा सकता है।
कोई भी कच्चा फल उपवास में ना लें लौंकी का जूस भी उपवास में लिया जा सकता है।
किंतु उपवास में किसी भी प्रकार का भोजन करने से बचें।
उपवास रखने से शरीर की शुद्धि होती है।
उपवास रखने से मन की शुद्धि होती है।
उपवास रखने से मस्तिष्क शांत होता है।
उपवास रखने से लीवर रिचार्ज होता है।
उपवास रखने से आंतो के भीतर और लीवर के भीतर यदि कोई घाव हो तो उसे भरने का समय मिल जाता है।
अल्सर के मरीजों को उपवास के समय एसा भोजन करना चाहिए जो बिल्कुल लिक्विड फार्म में हो ---
पपीता, जौ की मांड ; लौंकी का रस , और शकरकंदी की लोई, मूंग की दाल का घोटा ,
मूली के पत्तों का बारीक साग ,
अल्सर के मरीज उपवास में इनका सेवन बिना घी, बिना ,मिर्च, मसाले के साथ करें और शरीर के तापमान के बराबर भोजन का तापमान रखकर ही सेवन करें, दो समय जीरे का पानी पीएं और मुलैठी के जल को उपरोक्त बताई गयी वस्तुओं में मिला दें।
अल्सर तेजी से ठीक होगा !
उपवास सभी को करना चाहिए !
उपवास अनेक प्रकार के होते हैं, और हर प्रकार का उपवास एक आयुर्वेदिक उपचार है।
योग वासिष्ठ पढ़ें।
योग वासिष्ठ पढकर सभी को पढने के लिए प्रेरित करें।
जन्माष्टमी; एकादशी, शिवरात्रि ये उपवास बहुत ही लाभकारी हैं!
नवरात्रि के व्रत भी बहुत लाभकारी हैं, किंतु कमजोर लोग इसमें जूस - पपीता आदि का सेवन करते रहें!
कमजोर लोग प्रातः काल दही का सेवन भी उपवास में कर सकते हैं, किंतु वह खट्टी ना हो!
पपीता, उपवास में पेट की आंत को शुद्ध कर देता है!
उपवास पूर्ण हो जाए तो रात्रि में जौ के दलिए का सेवन करें!
खट्टी वस्तुएं, चाय, काफी , कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन उपवास में ना करें!
उपवास का फल है, पेट- मन - मस्तिष्क की शांति और शुद्धि!
यदि उपवास के दिन गलती से एक दो कोर भोजन कर लिया तो तुरंत वहीं अन्न का त्याग कर उसे किसी गांय या पशु को दे दें और आचमन करके पुनः उपवास जारी रखें ---
उपवास के दिन पेट ही नहीं मस्तिष्क को भी विचारों से रिक्त रखें।