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hanuman
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#🙏जय हनुमान💮 #हनुमान #🌟हनुमान चालीसा🙏 #जय बजरंग बली #🙏शनिवार भक्ती स्पेशल🌟 II हनुमान माला मंत्र II आपके प्रत्येक संकट का एकही समाधान "हनुमान माला मन्त्र"---- जब भाग्य ने सारे मार्ग बंद कर दिए हों,शत्रु हावी हों,कोर्ट मुकदमा से परेशानी हो,कर्ज से परेशान हो,रोजगार व धन की बाधा हो,भूत-प्रेत अथवा तन्त्र बाधा से पीड़ित हों।आपकी प्रत्येक समस्या का एक समाधान "हनुमान माला मन्त्र"। अपने समस्त पापों के साथ हनुमान जी के समक्ष जाएं व उनसे क्षमा याचना कर मीठा पान अर्पित कर सरसों के दीपक में दो लौंग डाल कर किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार से हनुमान माला मन्त्र का 11 पाठ करें।कुछ ही दिनों में सकारात्मक परिणाम अवश्य मिलेगा,यह एक टेस्टेड प्रयोग है। मन्त्र : ॐ नमो भगवते विचित्रवीर हनुमते प्रलयकालानल प्रभाज्वलत्प्रताप वज्रदेहाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय प्रकटविक्रमवीर दैत्य-दानवयक्षराक्षसग्रहबन्धनाय भूतग्रह प्रेतपिशाचग्रह शाकिनीग्रह डीकिनीग्रह काकिनीग्रह कामिनीग्रह ब्रह्मग्रह ब्रह्मराक्षसग्रह चोरग्रहबन्धनाय एहि एहि आगच्छ आगच्छ आवेशयावेशय मम ह्रदयं प्रवेशय प्रवेशय स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर सत्यं कथय कथय व्याघ्रमुखं बन्धय बन्धय सर्पमुखं बन्धय बन्धय राजमुखं बन्धय बन्धय सभामुखं बन्धय बन्धय शत्रुमुखं बन्धय बन्धय सर्व मुखं बन्धय बन्धय लंकाप्रसादभञ्जन सर्वजनं मे वशमानय वशमानय श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सर्वान आकर्षय आकर्षय शत्रून् मर्दय मर्दय मारय मारय चूर्णय चूर्णय खे खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया प्रज्ञया मम कार्यसिद्धि कुरू कुरू मम शत्रून् भस्मी कुरू कुरू स्वाहा ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् श्रीविचित्रवीरहनुमते मम सर्व शत्रून् भस्मी कुरू कुरू हन हन हुं फट् स्वाहा॥ ।।ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्रीरामदूताय नमः।। 🙏बजरंग बाण 🙏 🌺🌺🌺🌼🌼🌺🌺🌼🌼🌺 दोहा : निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ चौपाई : : जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥ आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥ जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥ बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥ अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥ लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥ अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥ जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥ जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥ ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥ ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥ जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥ बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥ भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥ इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥ सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥ जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥ पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥ बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥ जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥ जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥ चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥ उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥ ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥ ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥ अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥ यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥ पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥ यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥ धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥ दोहा : उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान। बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥ श्री राम दूतम् शरणम् प्रपद्द्ये
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