💥💫Mrs. Jyoti💫💥
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#🙏गोपाष्टमी 🐄 #गोपाष्टमी पर्व की मंगलमय शुभकामनाएँ..!
हिंदू धर्म में अक्षय नवमी का विशेष महत्व होता है। यह तिथि बहुत ही शुभ और पुण्यदायी तिथि मानी जाती है। अक्षय नवमी हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को पड़ती है। इस दिन का खास महत्व आंवला के पेड़ से जुड़ा है, जिसे स्वास्थ्य और औषधीय गुणों वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करनी चाहिए और वहीं भोजन बनाकर सबसे पहले भगवान विष्णु और शिवजी को भोग अर्पित किया जाता है। अक्षय नवमी पर श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हैं। शाम को पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। खासकर महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
अक्षय_नवमी_तिथि_और_शुभ_मुहूर्त:
पंचांग के शुक्ल नवमी तिथि 30 अक्टूबर 2025, सुबह 08:27 बजे से शुरू होगी और 31 अक्टूबर 2025, सुबह 10:03 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के नियमानुसार 31 अक्टूबर 2025 को अक्षय नवमी मनाई जाएगी।
#अक्षय_नवमी_पर_बन_रहे_हैं_कई_शुभ_योग:
इस अक्षय नवमी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन वृद्धि योग भी बन रहा है। यह योग समृद्धि और उन्नति देने वाला माना जाता है और यह सुबह 6:17 बजे से प्रभावी रहेगा। पूरे दिन रवि योग का संयोग भी है, जिसमें किए गए कार्य सफल माने जाते हैं और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है। इसके अलावा, शिववास योग भी बना है, जो पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए बहुत फलदायी माना जाता है।
#आंवले_के_पेड़_की_पूजा:
आंवले के पेड़ के तने को जल से सींचें. पेड़ के तने के चारों ओर कच्चा सूत (कलावा) लपेटें. फल, फूल, धूप, दीप, रोली, चंदन आदि से पूजा करें. आरती करें और 108 बार परिक्रमा करें. पूजा के बाद पेड़ के नीचे बैठकर अपनी मनोकामनाएं कहें. इस दिन सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अन्न, सोना, चांदी या फल-सब्जियों का दान करना चाहिए. दान करने से पुण्य ‘अक्षय’ हो जाता है. पूजा के बाद आंवले के पेड़ के नीचे ब्राह्मणों को भोजन कराएं और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें. माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. जो लोग व्रत करते हैं, उन्हें दिन भर व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए और शाम को आंवले के पेड़ की पूजा के बाद ही फलहार करना चाहिए।
#अक्षय_नवमी_का_महत्व:
पौराणिक शास्त्रों में अक्षय नवमी को अक्षय तृतीया के समान महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन किए गए स्नान, दान, तर्पण, पूजा और सेवा कार्यों का अक्षय पुण्य मिलता है। इतना ही नहीं, माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने सृष्टि को आंवले के पेड़ के रूप में स्थापित किया था और इस दिन स्वयं श्रीहरि विष्णु आंवले के पेड़ में निवास करते हैं। इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने से व्यक्ति को रोग-दोष से मक्ति मिलती है। यह नवमी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
#अक्षय_नवमी_का_लाभ:
इस दिन किए गए दान-पुण्य से जीवनभर सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
इस दिन व्रत रखने से संतान की उन्नति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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