Manvir Madhhur Official
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हे पार्थ : मनवीर मधुर
नमस्कार मित्रो,
कई दिनों से मन में ये विचार आ रहा है कि प्रतिदिन सुबह 7 बजे सामयिक संदर्भों से जुड़ी रचना, जैसे : दोहा, मुक्तक एवं घनाक्षरी आदि पोस्ट की जाए । और ये रचना “हे पार्थ…” शीर्षक से पोस्ट होगी । आपकी प्रतिक्रियायें हमें ऊर्जा प्रदान करेंगी । यदि कोई सुझाव हो तो वो भी आमंत्रित है ।
आज पहली रचना, दोहा आपके लिए :
“कहने का शुभ भाव है, या मन में है खोट ।
कभी-कभी एक शब्द भी, देता गहरी चोट ॥”
- मनवीर मधुर
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