बिहार की राजनीति

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Naman News
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#📰 बिहार अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #बिहार की राजनीति #नीतीश कुमार #सीएम नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार नीतीश कुमार की विरासत क्या है? उनका बेटा विधान परिषद का उम्मीदवार बन कर सदन में आएगा। 50 साल की राजनीति और 20 साल की सत्ता के बाद भी अगर एक विधान सभा सीट नीतीश कुमार के बेटे के लिए ख़ाली नहीं हो पायी तो क्या नीतीश और क्या विरासत। इस प्रकार तो सदन में भागवत झा आज़ाद का बेटा भी चुनकर चला गया। कौन सी विरासत की बात हो रही है। नीतीश कुमार अपना अंत तो निराशाजनक किया ही, बेटे का पोलिटिकल कैरियर भी शुरू होने से पहले ही ख़त्म कर दिया। नीतीश कुमार का बेटा राजनीति में आएगा तो संजय झा की तरह मनोनीत होकर, बताइए बात विरासत की हो रही है। 10 बार विधायक बन चुके बीमार लाचार नेता भी निशांत के लिए सीट छोड़ने को तैयार नहीं है। कुर्मी की बात, नालंदा की बात छोड़िए नीतीश कुमार का नेतृत्व तक का योगदान शायद उनके 10 बार विधायक बनने में नहीं रहा होगा। मैंने हमेशा कहा है नीतीश सबके है , लेकिन नीतीश का कोई नहीं है। जदयू में नीतीश कुमार एक आदमी का नाम बता दें जो उनके उनके लिए जीता मरता हो। श्रवण कुमार और नीरज कुमार जैसे लोगों ने नीतीश से वसूला है अब बिन माँ के बच्चे को सब मिलकर अभिमन्यु बनाने पर तुले हैं।
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#बिहार की राजनीति #सीएम नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार #नीतीश कुमार #📰 बिहार अपडेट नीतीश कुमार ने खेल कर दिया-बिहार के लोग समझ भी नहीं पाए। Nitish Kumar ने अपने बेटे Nishant Kumar को बिहार की राजनीति में बहुत सोच-समझ कर लाया है। तेजस्वी यादव से बिल्कुल अलग हटकर पहचान बनवा रहे हैं। नीतीश कुमार बहुत पहले से तैयारी कर चुके थे अपने बेटे निशांत कुमार को बिहार की राजनीति में लाने के लिए। जैसे-जैसे निशांत कुमार Bihar में घूम रहे हैं, उनके साथ लोगों की टीम है मैं कुछ रिसर्च के आधार पर बता रहा हूं। भोला पासवान शास्त्री बिहार के मुख्यमंत्री हुए, मगर आज उनका परिवार कहाँ है ? कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री हुए, एक बार जब चुनाव होने थे तो टिकट लिस्ट में कर्पूरी जी के साथ उनके बेटे को भी टिकट दिया गया था। फिर क्या, कर्पूरी जी गुस्से में बोले या तो मैं लड़ूंगा या वो लड़ेगा। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कर्पूरी जी के गुजर जाने के बाद उनके बेटे को राजनीति में लाया गया और आज वे केंद्र में मंत्री हैं। लालू यादव जी के पास अपनी पार्टी थी और कर्पूरी जी से सीख लेते हुए लालू जी तो चुनाव नहीं लड़ सकते थे, तो उन्होंने अपने बेटों को राजनीति में लाया, जिसमें तेजस्वी यादव को जनता ने स्वीकार किया । लेकिन जनता ने यह भी कहा कि तेजस्वी में लालू जैसी बात नहीं! परिणाम हम सब देख रहे हैं। नीतीश जी ने भी निशांत को राजनीति में लेकर आए हैं। नीतीश जी ने लालू जी और कर्पूरी जी दोनों से सीखा। इन्होंने अपने आप को कमजोर किया और धीरे-धीरे निशांत को स्पेस देने लगे। राजनीति में जरूरी होता है इतिहास से सीखना। सिखा-सिखाकर ही निशांत को लाया गया है, लेकिन अभी अग्नि परीक्षा बाकी है और यह परीक्षा लंबी चलेगी। असल में जनता भी परिवारवाद को स्वीकार करती है, मगर कई प्रकार की अपेक्षाएँ रखती है। जैसे बेटे को कम से कम बाप जैसा होना चाहिए शुरुआती दौर में, फिर अपने बाप से ऊपर उठकर अपनी लेगसी कायम करनी होती है, तब जाकर जनता उसे स्वीकार करती है। निशांत का मामला ऐसा है कि नीतीश जी से बहुत ज्यादा बातचीत हो नहीं पाती है, हो सकता है दोनों के बीच असहजता हो अक्सर बाप-बेटे में ऐसा होता है। इसलिए अक्सर ललन जी और संजय झा को निशांत के साथ देखा जाता है। इसका अर्थ क्या है? एक तो पार्टी के पदाधिकारियों को मालूम चले कि निशांत तक दरवाज़ा कहाँ से जाता है। दूसरा कि निशांत को भी यही दोनों पसंद हैं। आप यह कह सकते हैं कि कुछ सालों तक बैरम खाँ की भूमिका रहेगी दोनों की, लेकिन बादशाह अगर तगड़ा निकला तो छुट्टी भी सबसे पहले बैरम की ही होगी। दूसरा पक्ष यह भी है कि कहीं बैरम की तरह नहीं, हो सकता है सैयद बंधुओं की तरह हों? यह तो बादशाह की काबिलियत बताएगी। धीरे-धीरे निशांत कुमार बिहार की राजनीति में अपने पैर जमा लेंगे। उसके बाद सबसे पहले दूध में पड़ी मक्खी की तरह ललन सिंह और संजय झा को टीम से छुट्टी किया जाएगा।
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749 views 5 months ago
#बिहार की राजनीति #📰 बिहार अपडेट #राज्यसभा #🏹नीतीश कुमार🏹 मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के मुख्य आरोपी नीतीश कुमार और न जाने कितने काँडो के आरोपी था! और तो और CAG के रिपोर्ट में 900 करोड़ का घोटाला हुआ नीतीश सरकार में जो कुछ भी पता नही चला अभी तक! Neet छात्रा मामले में नीतीश के बेटे निशांत का नाम आया था इस खेल को ध्यान से समझिए! नीतीश कुमार सीएम बने रहने के लिए कौन-कौन सा कदम नहीं उठाया आप हम सब लोग इस बात को जान रहे है कभी इधर पलटी मारा कभी उधर पलटी मारा सिर्फ मुख्यमंत्री बने रहने के लिए! और एक दम से इतना आसानी से मुख्यमंत्री पद नही छोरने वाला था! और कल से एक दम से मीडिया में खबर चलने लगा मुख्यमंत्री राज्यसभा जाएंगे जाना चाह रहे हैं 2 दिन से मीडिया में चल रहा था और जबरदस्ती आज नॉमिनेशन करवा लिया गया! समझ सकते हैं कहीं न कहीं इंवॉल्व थे दोनों बाप बेटा इसी डर से झुककर भाजपा के दबाव में राज्यसभा के लिए नामांकन किया है! #NitishKumar
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