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पृथ्वी में जितने भी धान्य (चावल, जौ आदि), सुवर्ण, पशु और स्त्रियाँ हैं-वे सब-के-सब मिलकर भी उस पुरुष के मन को सन्तुष्ट नहीं कर सकते जो कामनाओं के प्रहार से जर्जर हो रहा है। विषयोंके भोगने से भोगवासना कभी शान्त नहीं हो सकती। बल्कि जैसे घी की आहुति डालने पर आग और भड़क उठती है, वैसे ही भोगवासनाएँ भी भोगोंसे प्रबल हो जाती हैं। श्रीमद्भागवत-महापुराण/९/१९/१३-१४ श्रीमद्भागवत-महापुराण/9/19/13-14 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #श्रीमद्भागवत #श्राद्धकर्म #श्राद्धविधि #श्राद्धपक्ष #shradhpaksh #MBAPanditJi #PuranikYatra

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