ShareChat
click to see wallet page

विद्वान पुरुष उस दान की प्रशंसा नहीं करते, जिसके बाद जीवन-निर्वाह के लिए कुछ बचे ही नहीं। जिसका जीवन-निर्वाह ठीक-ठीक चलता है - वही संसार में दान, यज्ञ, तप और परोपकार के कर्म कर सकता है। जो मनुष्य अपने धन को पाँच भागों में बाँट देता है - कुछ धर्म के लिए, कुछ यश के लिए, कुछ धन की अभिवृद्धि के लिए, कुछ भोगों के लिए और कुछ अपने स्वजनों के लिए - वही इस लोक और परलोक दोनों में ही सुख पाता है। श्रीमद्भागवत-महापुराण/८/१९/३६-३७ श्रीमद्भागवत-महापुराण/8/19/36-37 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #PuranikYatra #MBAPanditJi

551 ने देखा