देवासुर संग्राम में दैत्यराज बलि की सेना में नमुचि नाम का दैत्य था। देवराज इंद्र ने वज्र का प्रहार किया तो नमुचि पर कोई असर नहीं हुआ। यह देख इंद्र सोच में पड़ गया कि इस वज्र से मैने बड़े बड़े दैत्यों और दानवों को मारा पर इस नमुचि पर तो इसका कोई असर ही नहीं। तभी आकाशवाणी हुई कि "नमुचि को न गीली वस्तु से मारा जा सकता है और न ही सूखी वस्तु से। तुम्हे इसे मारने के लिए कोई और ही उपाय सोचना होगा।" इसके बाद इंद्र को सुझा की समुद्र की फेन सूखा भी है और गीला भी। इसके बाद इंद्र ने इसी फेन से हथियार बना कर नमुचि का वध किया।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/८/११/३२-४०
श्रीमद्भागवत-महापुराण/8/22/32-40
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