अमन और भाईचारे के इस भारतवर्ष में कुछ लोग ऐसे हैं जो गंगा जमुनी तहजीब को थामे हुए हैं। हम बात कर रहे हैं दिल्ली की रहने वाली नेहा भारती की।
धर्म से हिंदू होने के बाद भी नेहा भारती रमजान के पाक महीने में रोज़ अपने घर में इफ्तारी का सामान बनाती हैं, और उसे लेकर जामा मस्जिद पहुँच जाती हैं। हर रोजेदार को वह न केवल इफ्तार कराती हैं, बल्कि मोहब्बत और एकता की एक खास मिसाल भी पेश कर रही हैं।
नेहा भारती पुरानी दिल्ली की रहने वाली हैं और अपना एक NGO चलाती हैं। उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में M.A. किया है और वर्तमान में वह PhD की तैयारी कर रही हैं। बचपन से ही उन्हें लोगों की सेवा के लिए कुछ करने की इच्छा थी। इसलिए वह ऐसे नेक काम करती रहती हैं।
वह बताती हैं, "ऐसा करने से मुझे खुशी मिलती है, मैं रोज अलग-अलग चीजें बना कर लाती हूं, ताकि लोग एक चीज खा कर बोर न हो जाएं। जैसे कभी ब्रेड पकोड़ा, पकोड़े, चाउमीन और फ्रूट्स.. इसको बनाने में मेरे माता-पिता, भाई, बहन और दोस्त मदद करते हैं। सुबह से ही सभी मिलकर इफ्तारी का सामना बनाना शुरू कर देते हैं। शाम को इफ्तार से 30 मिनट पहले मैं जामा मस्जिद पहुंच जाती हूँ।"
नेहा बीते 3 सालों से यह काम कर रही हैं; और लगातार 30 दिनों तक लोगों को इफ्तारी करवाती हैं। वह दिन लगभग 300 -350 लोगों का पेट भरती हैं। वह चाहती हैं कि और भी युवा इस नेक काम में उनका साथ दें, ताकि हर देशवासी तक भाईचारे और एकता का पैगाम पहुँचे।
उनकी यह मुहिम सच में तारीफ के काबिल है! नेहा रोज़ाना अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट डालती हैं, ताकि लोगों को यह संदेश दिया जा सके कि कोई कितनी भी नफरतों को बढ़ाने की कोशिश कर ले, लेकिन उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लोगों के बीच मोहब्बतें जिंदा थी और रहेंगी।
" कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी,सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा,सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा।"🫡🫡🫡👍🇮🇳🙏🙏🙏
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