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इश्क के उल्फत में हो जो,
वो इश्क फरमाना छोर दे!
इस सिरफिरे से परिंदें से,
जो वो पर चुराना छोड़ दे!
करकर के यूँ गुस्ताखियाँ,
जो वो दिल बहलाना छोर दे!
पर्दों के पीछे से बड़बस ही,
जो वो आह जगाना छोड़ दे!
कनखियों के ओट से जो,
छेड़कर वो इतराना छोड़ दे!
सताय फिर कायदे से जो वो,
दिल पे मरहम लगाना छोड़ दे!
गले लगकर एहसासों में जो,
वो कुछ पल ही आना छोर दे!
बढ़ते हुए साँसों को थामे,
जो वो धड़कन बढ़ाना छोर दे!
छोर दूँ मैं एकपल में मगर,
जो वो मुस्कुराना छोड़ दे!
कायनात में से चुराकर,
उसने कुछ रचा ही ऐसा है!
पगलीं करीब जो आजाए और...
फिर दिल मे घर बनाना छोड़ दे!💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️