ले चलो मुझे कहीं दूर, इस भीड़-भाड़ से बहुत दूर,जहाँ शाम ढलती हो गंगा के घाट पर,और गूँजता हो मन्त्रों का कोई मीठा सुर।अब नहीं रहा दुनिया से कोई वास्ता मुझे,बस एक बनारस की गलियाँ और तेरा साथ चाहिए,वहीं बैठकर सुकून से कट जाए ये ज़िंदगी,अब दुनिया की इस भीड़ में मुझे खुद को नहीं तलाशना।🌹 बस मै और तुम ❤️❤️ मेरे हमसफ़र 💞💞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️