जो मनुष्य 'शिव' शब्द का उच्चारण करके प्राणों का परित्याग करता है, वह कोटि जन्मों के उपार्जित पाप से मुक्त हो मोक्ष प्राप्त कर लेता है। 'शिव' शब्द कल्याण का वाचक है और कल्याण शब्द मुक्ति का। शिव के उच्चारण से मोक्ष या कल्याण की प्रप्ति होती है, इसीलिए महादेवजी को शिव कहा गया है।
'शि' पापनाशक अर्थ में है और 'व' मोक्षदायक अर्थ में। महादेवजी मनुष्यों के पापहन्ता और मोक्षदाता हैं इसीलिए उन्हें शिव कहा गया है।
ब्रह्मवैवर्तपुराण।ब्रह्मखण्ड।६।४९-५२
ब्रह्मवैवर्तपुराण/ब्रह्म-खण्ड/6/49-52
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