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जीव अनादिकाल से जन्म-मृत्युरूप संसार के चक्कर में भटक रहा है। जब उस चक्कर से छूटने का समय आता है, तब उसे सत्संग प्राप्त होता है। यह निश्चय है कि जिस क्षण सत्संग प्राप्त होता है, उसी क्षण संतो के आश्रय, कार्य-कारणरूप जगत् के एकमात्र स्वामी भगवान् में जीव की बुद्धि अत्यन्त दृढ़ता से लग जाती है। श्रीमद्भागवत-महापुराण/१०/५१/५४ श्रीमद्भागवत-महापुराण/10/51/54 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #श्रीमद्भागवत #श्राद्धकर्म #श्राद्धविधि #श्राद्धपक्ष #shradhpaksh #shradh #naradpuran #naradapuran #naradpurankatha #PuranikYatra #MBAPanditJi

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3 दिन पहले