ShareChat
click to see wallet page

द्वारका जाने के बाद एक बाद बलरामजी व्रज में नन्द बाबा और दूसरे गोपों से मिलने के लिए आए। एक बार रात्रि के समय उन्होंने सभी गोपियों को बुलाया और उनके साथ विहार करने लगे। इसी दौरान जलक्रीड़ा के लिए उन्होंने यमुनाजी को पुकारा। यमुनाजी जब उनकी पुकार पर नहीं आई तो बलरामजी को बड़ा क्रोध हुआ। उन्होंने उसे अपने हल की नोक से खींचना शुरू कर दिया। ये देखकर यमुनाजी जी उनसे प्रार्थना करी और क्षमा मांगी। यमुनाजी आज भी बलरामजी के खींचे हुए मार्ग से बहती है। श्रीमद्भागवत-महापुराण/१०/६५ श्रीमद्भागवत-महापुराण/10/65 #PuranikYatra #MBAPanditJi #ब्रह्मवैवर्त_पुराण_कथा #shivmahapuran #shiv #shiva #शिवमहापुराण #bhavishypuran #vedpuran #puranam #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #श्रीमद्भागवत #श्राद्धकर्म #श्राद्धविधि #श्राद्धपक्ष #shradhpaksh #shradh #naradpuran #naradapuran #naradpurankatha #शिवमहापुराणकथा #shivmahapurankatha #ब्रह्मवैवर्तपुराण #hindu #sanatan #brahmvaivartpuran #PuranikYatra #MBAPanditJi

544 ने देखा
3 घंटे पहले