Anuj kumar Singh
530 views
1 months ago
पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत करना मना किया गया है। न, अति, अश्नतः, तु, योगः, अस्ति, न, च, एकान्तम्, अनश्नतः, न, च, अति, स्वप्नशीलस्य, जाग्रतः, न, एव, च, अर्जुन।।16।। हे अर्जुन! यह योग(भक्ति) न तो बहुत खाने वाले का, न बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात्‌ व्रत रखने वाले का, न बहुत सोने वाले का और न सदा जागने वाले का सिद्ध होता है। পবিত্র শ্রীমদ্ভগবদ গীতা অধ্যায় ৬ শ্লোক ১৬-তে উপবাস করতে নিষেধ করা হয়েছে। ন, অতি,অশ্নতঃ, তু, যোগঃ, অস্তি, ন, চ, একান্তম্, অনশ্নতঃ, ন, চ, অতি, স্বপ্নশীলস্য, জাগ্রতঃ, ন, এব, চ, অর্জুন।।১৬।। হে অর্জুন! এই যোগ(ভক্তি) না তো অতিরিক্ত ভোজনকারী ব্যক্তির, না উপবাসকারীর, না অতিরিক্ত শয়নকারীর এবং না সর্বদা জাগ্রত ব্যক্তির দ্বারা সিদ্ধ হয়। #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🌷शुभ रविवार #📝गणपति भक्ति स्टेटस🌺 #🪔नवरात्रि Status⏳