#श्रीरामचरितमानस चोपाई
राम नाम की महिमा:
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रामचरितमानस से 25 दोहे
राम नाम
नाम राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।
जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु॥
अर्थ:
कलियुग में यह राम नाम कल्पवृक्ष के समान है, जो मनवांछित फल देने वाला है, और सभी प्रकार के कल्याणों का निवास स्थान है। इसी नाम का स्मरण करने से ही भाँग के समान नीच (निकृष्ट) तुलसीदास, पवित्र तुलसी के समान हो गए। यह नाम इतना परम पवित्र और मंगलकारी है कि इसके स्मरण से निकृष्ट जीव भी श्रेष्ठता को प्राप्त कर लेता है, और भवसागर से पार हो जाता है।
नाम कामतरु काल कराला। सुमिरत समन सकल जग जाला॥
राम नाम कलि अभिमत दाता। हित परलोक लोक पितु माता॥
अर्थ:
यह राम नाम इस भयानक कलियुग के काल में कल्पवृक्ष के समान है, जिसके स्मरण मात्र से ही संसार के सारे जंजाल (माया-मोह के बंधन और दुःख) शांत हो जाते हैं। यह राम नाम कलियुग में सभी मनोवांछित फल देने वाला है और परलोक में हितैषी (परम धाम देने वाला) तथा इस लोक में माता-पिता के समान सब प्रकार से पालन और रक्षण करने वाला है।
महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू॥
महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ॥
अर्थ:
जिस राम नाम को महादेव (शिवजी) निरंतर जपते रहते हैं और काशी में मुत्यु को प्राप्त होने वाले जीवों को मुक्ति के लिए उपदेश देते हैं, उस नाम की महिमा को गणेशजी भी जानते हैं, जिनकी सर्वप्रथम पूजा भी इसी नाम के प्रभाव से होती है। यह नाम ही समस्त सिद्धियों का मूल और परम पावन है, और शिवजी का तारक मंत्र है।
कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना। एक अधार राम नाम गुन गाना॥
राम नाम जपिए सदा हियँ धरि दृढ़ बिस्वास।
भवसागर तरि जाइहौ प्रभु करि हैं उर बास॥
अर्थ:
कलियुग में न तो योग का, न यज्ञ का और न ही ज्ञान का वह महत्व है। केवल एक ही आधार है, और वह है राम नाम के गुणों का गान करना। अतः, हृदय में दृढ़ विश्वास धारण करके सदा राम नाम का जप करते रहना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य सहज ही भवसागर को पार कर जाता है और प्रभु स्वयं उसके हृदय में वास करते हैं, जिससे परम शांति मिलती है।
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम पाहीं॥
राम नाम जपि सफल भए, जे सकल सिद्धि पावहिं।
करम धरम नहिं साधना, नामहिं ते पार जावहिं॥
अर्थ:
हे तात! संसार में ऐसा कौन सा कठिन कार्य है जो आपसे न हो सके? (यहाँ नाम की महिमा कही गई है कि नाम सब कुछ कर सकता है)। जिस राम नाम का जप करके सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त हुईं और सभी कार्य सिद्ध हुए। कलियुग में कर्म, धर्म, और अन्य साधनाओं के बिना भी केवल राम नाम के आश्रय से ही मनुष्य भवसागर के पार चला जाता है।
भायँ कुभायँ अनख आलस हू। नाम जपत मंगल दिसि दस हूँ॥
सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा॥
अर्थ:
अच्छे भाव (प्रेम) से, बुरे भाव (बैर) से, क्रोध से या आलस्य से— किसी भी तरह से राम नाम जपने से दसों दिशाओं में कल्याण ही कल्याण होता है। उसी परम कल्याणकारी राम नाम का स्मरण करके और श्री रघुनाथजी को मस्तक नवाकर मैं रामजी के गुणों का वर्णन करता हूँ। नाम जप का महत्व भाव पर निर्भर नहीं करता, वह हर हाल में मंगलकारी है।
जान आदि कबि नाम प्रतापू। भएउ सुद्ध करि उलटा जापू॥
सहस नाम सम सुनि शिव बानी। जपि जेईं सँग गिरिजा भवानी॥
अर्थ:
आदिकवि श्री वाल्मीकिजी राम नाम के प्रताप को जानते हैं, जो उल्टा नाम ('मरा', 'मरा') जपकर पवित्र हो गए। इस प्रकार राम नाम का प्रभाव जान लेने के कारण, श्री शिवजी के इस वचन को सुनकर कि एक राम-नाम एक हजार नामों के समान है, पार्वतीजी (भवानी) सदा अपने पति (श्री शिवजी) के साथ राम-नाम का जप करती रहती हैं।
राम नाम कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई॥
सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि॥
अर्थ:
राम नाम कलियुग में सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाली कामधेनु गौ है और सज्जनों के लिए सुंदर संजीवनी जड़ी है। पृथ्वी पर यही अमृत की नदी है, जो जन्म-मरणरूपी भय का नाश करने वाली और भ्रम रूपी मेंढकों को खाने के लिए सर्पिणी के समान है। यह नाम ही परम कल्याणकारी और जीवन का आधार है।
अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा॥
सोइ नाम राम कहँ जपहिं संत, तजि सकल काम अरु रोप॥
अर्थ:
निर्गुण और सगुण ब्रह्म के दो स्वरूप हैं, जो दोनों ही अकथनीय, अथाह, अनादि और अनुपम हैं। संतजन समस्त कामनाओं और क्रोध को त्यागकर उसी राम नाम का जप करते हैं, क्योंकि यह नाम ही दोनों स्वरूपों का मूल है। नाम के माध्यम से ही निर्गुण और सगुण दोनों की प्राप्ति सहज हो जाती है।
राम नाम नृसिंह तनु भयऊ। कलिजुग हिरनकसिपु सोइ रयऊ॥
जापक जन प्रहलाद जिमि पाल ही। दलि सुरसाल राम नाम रखवाल ही॥
अर्थ:
राम नाम नृसिंह भगवान के शरीर जैसा है, कलियुग ही वह हिरण्यकशिपु है। राम नाम जपने वाले मनुष्य प्रहलाद के समान हैं। यह राम नाम ही देवताओं के शत्रु (कलियुग रूपी असुर) को मारकर जप करने वालों की सदैव रक्षा करता है। राम नाम की शक्ति भक्तों के लिए परम रक्षक है।
राम नाम मनि दीप धरू जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजियार॥
अर्थ:
गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि यदि तुम भीतर (हृदय) और बाहर (संसार) दोनों ओर उजाला (ज्ञान का प्रकाश और मंगल) चाहते हो, तो राम नाम रूपी मणि दीपक को अपनी जीभ रूपी देहरी के द्वार पर धर लो। यह नाम ही ज्ञान का प्रकाश देने वाला और समस्त अंधकार को दूर करने वाला है।
दोउ अक्षर मधुर मनोहर जान। लोचन जगत जीव के प्रान॥
सुगम सुसाहिब सुमिरत सुखदाता। हितकारी, राम नाम जगत्राता॥
अर्थ:
राम नाम के दोनों अक्षर ('रा' और 'म') मधुर और मनोहर हैं, जो वर्णमाला रूपी शरीर के नेत्र हैं, भक्तों के जीवन हैं तथा स्मरण करने में सबके लिए सुलभ और सुख देने वाले हैं। यह नाम ही परम हितकारी है और समस्त जगत का उद्धार करने वाला है। यह नाम जपने में अत्यंत सरल और सहज है।
नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी॥
जिन्ह कछु कीन्ह जान तिन्ह जाना। राम नाम सब साधन माना॥
अर्थ:
राम नाम और रूप की गति (महिमा) अकथनीय और अनूठी है। उसे समझने पर सुख मिलता है, पर उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। जिन्होंने कुछ भी साधन किया है, उन्होंने यही जाना है कि राम नाम ही समस्त साधनों में श्रेष्ठ है। यह नाम सभी रहस्यों का सार और अनुभव का विषय है।
गिरिजा जाहि सहस मुख गावहिं। सोइ नाम तुम कहुँ सुनावाहिं॥
सहस नाम सम राम नाम। यह जानहिं शिव, भवानी धाम॥
अर्थ:
हे पार्वती! जिसका सहस्र मुख वाले (शेषनाग) भी गान करते हैं, वही परम पवित्र राम नाम मैंने तुमको सुनाया है। एक राम नाम सहस्र (हजारों) नामों के समान है, यह रहस्य श्री शिवजी जानते हैं, क्योंकि उनके हृदय में भवानी (पार्वती) वास करती हैं और वे दोनों इस नाम का नित्य जप करते हैं।
सुमिरि पवनसुत पावन नामू। आपु सहित बस कीन्हे रामू॥
नाम प्रताप सिंधु सुकाइ। सहजहि कपि दल पार गइ॥
अर्थ:
पवनसुत हनुमानजी ने इसी राम नाम का स्मरण करके स्वयं को तो पवित्र किया ही, साथ ही श्री रामजी को भी अपने वश में कर लिया (उनके परम प्रिय बन गए)। इसी नाम के प्रताप से समुद्र सूख गया और वानरों की सेना सहज ही पार चली गई। नाम की शक्ति भगवान की शक्ति से भी बढ़कर मानी गई है।
जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी॥
राम नाम जपि ते सुख लहहिं। जे जन काहू भाँति न चहहिं॥
अर्थ:
जब अतिशय दुःखी और संकटग्रस्त मनुष्य राम नाम का जप करते हैं, तो उनके सभी बुरे संकट मिट जाते हैं और वे सुखी हो जाते हैं। जो मनुष्य किसी भी प्रकार की इच्छा नहीं रखते, वे भी राम नाम का जप करके ही परम सुख को प्राप्त होते हैं। यह नाम आर्त और अर्थार्थी दोनों को ही सुख प्रदान करता है।
हरन अमंगल अखिल कल्यान। राम नाम जप सब जग जान॥
सोइ नाम जेहि कर सुमिरन कीन्हा। पार भयो सब जगत अतीन्हा॥
अर्थ:
समस्त अमंगलों को हरने वाला और संपूर्ण कल्याणों को करने वाला राम नाम का जप है, यह बात सारा संसार जानता है। यह वही नाम है जिसका स्मरण करके, जिसने भी इसे जपा है, वह इस अपार संसार सागर से पार हो गया है। यह नाम ही समस्त पापों का नाशक और मंगल का दाता है।
नाम प्रभाउ बिचित्र अति, कहउँ कछुक समुझाई।
राम नाम बिनु जे नर करहीं, ते भव न तरहिं जाई॥
अर्थ:
राम नाम का प्रभाव अत्यंत ही विचित्र है, मैं उसे कुछ समझाकर कहता हूँ। जो मनुष्य राम नाम का आश्रय लिए बिना अन्य साधन करते हैं, वे इस संसार रूपी भवसागर को पार करके नहीं जा सकते। नाम ही एक मात्र सरल और सुगम मार्ग है, जो पार लगाता है।
कलि केवल नाम अधारा। सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥
राम नाम ते पाप सबै जरि। भवसागर में मन नहिं डरि॥
अर्थ:
कलियुग में केवल राम नाम ही एक मात्र आधार है। मनुष्य उसी नाम का बार-बार स्मरण करके भवसागर के पार उतर जाते हैं। राम नाम के प्रभाव से सारे पाप जलकर भस्म हो जाते हैं, और मनुष्य के मन में संसार रूपी सागर से डर नहीं लगता।
नाम प्रताप महा बल भारी। पाप पुंज जाहिं छन हारी॥
राम नाम सोई जानहिं, जा पर कृपा करहिं।
करम धरम नहिं साधना, नामहिं ते भव तरहिं॥
अर्थ:
राम नाम का प्रताप बहुत बड़ा और महान बलशाली है, जिसके प्रभाव से पापों के समूह भी एक क्षण में नष्ट हो जाते हैं। उस राम नाम की महिमा को वही जानता है जिस पर श्री रामजी की विशेष कृपा होती है। इस कलियुग में कर्म, धर्म और अन्य साधनाओं की आवश्यकता नहीं, केवल नाम के बल पर ही जीव संसार सागर से पार हो जाता है।
अगुन सगुन कहँ नहिं भेदू, राम नाम दुइ रूपु।
नाम रूप दुइ एक सम, यहि विधि सहज अनूपु॥
अर्थ:
निर्गुण और सगुण ब्रह्म में कोई भेद नहीं है, राम नाम ही उनके दो स्वरूप हैं। नाम और रूप दोनों ही एक समान हैं, इस प्रकार यह नाम सहज ही अनुपम है। यह नाम दोनों ही ब्रह्म स्वरूपों को अपने में समाहित किए हुए है, और नाम का जप करने वाला दोनों को प्राप्त करता है।
मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी॥
राम नाम महिमा अमित, तुलसी सोइ गावहिं।
जेहि कर कृपा राम की, ते भवसिंधु पावहिं॥
अर्थ:
जो मंगल के धाम और अमंगल को हरने वाले हैं, दशरथ के आँगन में विहार करने वाले उन श्री राम पर मेरी भक्ति से द्रवित हों। राम नाम की महिमा अपार है, तुलसीदास तो केवल वही गाते हैं। जिस पर राम नाम की कृपा होती है, वे ही इस संसार रूपी सागर को पार कर पाते हैं।
राम नामु सब कोउ कहै, दसरथ सुत कोउ कोउ।
जनम जनम के पाप कटै, राम नाम कहि लोउ॥
अर्थ:
राम नाम तो सभी कहते हैं, परन्तु दशरथ के पुत्र (सगुण स्वरूप) को कोई-कोई ही जान पाता है। अतः तुम अपने जन्म-जन्म के पापों को काटने के लिए केवल राम नाम को लेकर जपो। नाम की शक्ति इतनी प्रबल है कि वह नाम लेने वाले के समस्त संचित पापों का नाश कर देती है।
जो सुमिरत सिधि होइ, गनि सकल कल्यान।
राम नाम जपिए सदा, हियँ धरि दृढ़ ग्यान॥
अर्थ:
जिस राम नाम का स्मरण करने से सभी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं और समस्त कल्याणों की गिनती हो जाती है, ऐसे राम नाम को सदा हृदय में दृढ़ ज्ञान धारण करके जपना चाहिए। यह नाम ही सफलता का दाता, कल्याण का मूल और समस्त ज्ञानों का सार है।
राम नाम की महिमा, अगम निगम कहुँ गान।
तुलसीदास आस करहिं, बस राम नाम हियँ जान॥
अर्थ:
राम नाम की महिमा तो अगम्य है, जिसका वर्णन वेद और शास्त्र भी करते हैं। तुलसीदास तो बस यही आशा करते हैं कि उनके हृदय में केवल राम नाम ही वास करे। यह नाम ही जीवन की अंतिम सत्य और परम आश्रय है, जिससे बढ़कर कोई और सत्य नहीं है।