Shamsher bhalu Khan
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1 months ago
#सवाल_दर्द_बात दर्द की बातें किसे पता है यार दर्द की यादें। ये खाली पेट बड़ी ज़िम्मेदारी शौक और ख्वाब खुला आकाश सूनी तंग गलियां उड़ती धूल। भटकी लाशें शून्य आवरण में रोयें कि हँसे। आपराधिक घुमंतू विचलित हैं यायावर। ये यादें कैसी तपती धरती पे राख का ढेर। नंगे पैरों को अंधेरों में रोशनी खींच के लाई। एक अरसा तिल तिल तरसा बूंद के लिए। प्यासे की जात रेत में जमा पानी है याद रहा। कुछ छुटा है तलाश किरणों की वह है कहां। छोड़ गया है डूबता हुआ सूर्य एक सवाल। #जिगर_चूरुवी # #🤲 दुआएं #🎄हरे पेड़