-Manoj Chauhan
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3 days ago
"रोने दे जी भर के" आज फिर मुझे जी भर के रोने नदिया तेरी तन्हाइयों ने अकेला मुझे होने न दिया मेरी हस्ती भी नही थी तुझे भुलाने की तेरी यादों के सफर ने मुझे रोने न दिया, लोग कहते हैं मैं भूल जाऊं तुम्हें तेरी यादों ने तन्हा होने न दिया कितनी हसरत से बनाया था मैंने गुलिस्ता उन फूलों की खुशबू ने मुझे सोने न दिया, इश्क के चर्चे तेरे महफिलों में होते रहे उसकी आवाज में मुझे रोने न दिया किसको सुनाए अपनी दिल कि हाल, कभी उसने हमे अपना होने न दिया!! लेखक:मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺