"रोने दे जी भर के"
आज फिर मुझे जी भर के रोने नदिया
तेरी तन्हाइयों ने अकेला मुझे होने न दिया
मेरी हस्ती भी नही थी तुझे भुलाने की
तेरी यादों के सफर ने मुझे रोने न दिया,
लोग कहते हैं मैं भूल जाऊं तुम्हें
तेरी यादों ने तन्हा होने न दिया
कितनी हसरत से बनाया था मैंने गुलिस्ता
उन फूलों की खुशबू ने मुझे सोने न दिया,
इश्क के चर्चे तेरे महफिलों में होते रहे
उसकी आवाज में मुझे रोने न दिया
किसको सुनाए अपनी दिल कि हाल,
कभी उसने हमे अपना होने न दिया!!
लेखक:मनोज चौहान, 🌹✍️...
#🌷..chauhan..💐🌺