पांचवे रैवत मन्वन्तर में रैवत मनु थे और इंद्र का नाम विभु था। इसी समय में शुभ्र ऋषि की पत्नी का नाम था विकुण्ठा। उन्हीं के गर्भ से वैकुण्ठ नमक श्रेष्ठ देवताओं के साथ अपने अंश से स्वयं भगवान् ने वैकुण्ठ नामक अवतार धारण किया। उन्होंने लक्ष्मी देवी की प्रार्थना से उनको प्रसन्न करने के लिए वैकुण्ठधाम की रचना की थी। वह लोक समस्त लोकों में श्रेष्ठ है।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/८/५/४-५
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