MBAPanditJi
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MBA Pandit Ji
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जिस प्रकार सुवर्ण की खानों में पत्थर में मिले हुए सुवर्ण को उसके निकालने की विधि जानने वाला स्वर्णकार उन विधियों से उसे प्राप्त कर लेता है, वैसे ही अध्यात्म तत्व को जानने वाला पुरुष आत्मप्राप्ति के उपायों द्वारा अपने शरीर रूप क्षेत्र में ही ब्रह्मपद का साक्षात्कार कर लेता है। श्रीमद्भागवत-महापुराण/७/७/२१ श्रीमद्भागवत-महापुराण/7/7/21 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #MBAPanditJi #PuranikYatra
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MBA Pandit Ji
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जिस समय मनुष्य अपने मन में रहने वाली कामनाओं का परित्याग कर देता है, उसी समय वह भगवत्स्वरूप को प्राप्त कर लेता है। श्रीमद्भागवत-महापुराण/७/१०/९ श्रीमद्भागवत-महापुराण/7/10/9 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #MBAPanditJi #PuranikYatra
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MBA Pandit Ji
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अश्रद्धया हुतं दत्तं तपस्तप्तं कृतं च यत् । असदित्युच्यते पार्थ न च तत्प्रेत्य नो इह ।।२८।। हे पार्थ! बिना श्रद्धा के किया हुआ हवन, दिया हुआ दान एवं तपा हुआ तप और जो कुछ भी किया हुआ कर्म है- वह सब 'असत्' है - इस प्रकार कहा जाता है। वह न तो इस लोक में और न परलोक में ही लाभदायक है। अतः समर्पण के साथ श्रद्धा नितान्त आवश्यक है। श्रीमद्भगवद्गीता: यथार्थ गीता/१७/२८ स्वामी अड़गड़ानन्द जी यथार्थ गीता: स्वामी अड़गड़ानन्द जी। #swamiadgadanand #shrimadbhagwatgeeta #puranikyatra #mbapanditji #श्रीमद्भगवद्गीता #गीता #bhagwadgeeta #bhavishypuran #vedpuran #puranam #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #PuranikYatra #MBAPanditJi
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