जैसे स्वप्न टूटने पर मनुष्य स्वप्न के सम्बन्धियों से आसक्त नहीं रहता - वैसे ही ज्यों-ज्यों सत्संग के द्वारा बुद्धि शुद्ध हो, त्यों ही त्यों शरीर, स्त्री, पुत्र, धन आदि की आसक्ति स्वयं छोड़ता चले। क्योंकि एक-न-एक दिन ये छूटने वाले ही हैं।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/७/१४/४
श्रीमद्भागवत-महापुराण/7/14/4
#bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads
#shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता
#MBAPanditJi #PuranikYatra