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यह चित्र एक रक्षा यंत्र-मंत्र का स्वरूप है, जिसका उद्देश्य साधक को नकारात्मक शक्तियों, अशुभ ग्रह प्रभाव, भय, रोग और अनिष्ट से बचाना होता है। प्रमुख विशेषताएँ – 1. ॐ का प्रयोग यंत्र के केंद्र से लेकर चारों ओर तक "ॐ" की परिक्रमा की गई है। "ॐ" को आदि अनादि नाद, ब्रह्मांडीय शक्ति और दिव्य ऊर्जा का स्रोत माना गया है। बार-बार "ॐ" लिखने से यंत्र में कंपन (vibrations) उत्पन्न होते हैं जो साधक की आभा (Aura) को सुरक्षित करते हैं। 2. बीच का मंत्र "ॐ मधुकर को रक्षय–रक्षय, पालय–पालय" यहाँ साधक का नाम लेकर (मधुकर) दिव्य शक्तियों से रक्षा और पालन-पोषण की प्रार्थना की गई है। इसे व्यक्तिगत रक्षा कवच मंत्र कहा जा सकता है। 3. मंत्र पंक्तियाँ नीचे "सदा भवानी साथ सहित, गौरी पुत्र गणेशा। पंच देव रक्षा करें, कमला विष्णु महेशा॥" इस श्लोक में माता भवानी, गणेश, पंचदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश, दुर्गा, गणेश) तथा लक्ष्मी–नारायण से रक्षण की प्रार्थना की गई है। यह श्लोक यंत्र को और भी शक्तिशाली व पूर्ण बना देता है। महत्व – इसे नित्य पूजन स्थल पर रखकर प्रातः- सायं धूप-दीप से आराधना करने से अदृश्य सुरक्षा कवच बनता है। नकारात्मक विचार, भय, तनाव और अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। साधक को आत्मविश्वास, मानसिक शांति और दिव्य सुरक्षा का अनुभव होता है। जब नाम लेकर रक्षा-मंत्र लिखा जाता है तो वह विशेष रूप से उसी व्यक्ति के लिए फलदायी होता है। 👉 संक्षेप में, यह रक्षा यंत्र-मंत्र एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक सुरक्षा कवच है, जो साधक के जीवन में आत्मबल, शांति और सुरक्षित ऊर्जा का संचार करता है। #ज्योतिष वास्तु यंत्र मंत्र तंत्र #भैरव तंत्र #मंत्र साधना#यंत्र मंत्र तंत्र#टोटके और उपाय#ज्योतिष# #यंत्र तंत्र मंत्र #तंत्र मंत्र यंत्र #सनातन धर्म#उपदेश#सूक्ति#यंत्र,मंत्र,तंत्र#