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इनकी भाषा देखो। ये इस देश के प्रधानमंत्री हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की बागडोर इनके हाथ में है। हिंदुओं की हजारों साल की संस्कृति, संस्कार, भाषा, धर्म और तर्कशास्त्र का बोझ भी इन्हीं के नाजुक कंधों पर है। लेकिन भाषा एकदम टपोरी टाइप, सड़कछाप, दो कौड़ी के लुच्चों वाली।
कौन लिखता है इनके लिए? इतना घटिया लेखक कहां मिला इनको? या फिर ये खुद ही इतने बड़े ज्ञानी हैं कि अभद्र भाषा ही इनका गहना है? इस भाषा के साथ ये सपना दिखाते हैं कि हम विश्वगुरु बनेंगे!
बाकी तथ्य में उतनी ही सच्चाई है जितना सच बोलने के लिए ये कुख्यात हैं..!!
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##कौशिक-राज़... ✍️