#✋भगवान भैरव🌸
'अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता' - क्या आप जानते हैं महाबली हनुमान की ८ अजेय सिद्धियाँ कौन सी हैं? 🚩✨
हम सभी ने श्री हनुमान चालीसा में इस चौपाई का पाठ अवश्य किया है। इसका अर्थ है कि महावीर हनुमान आठ प्रकार की सिद्धियों और नौ निधियों को प्रदान करने वाले हैं। हिन्दू धर्म में घोर साधना से प्राप्त होने वाली अनेक सिद्धियों का वर्णन है, किन्तु जो इन ८ सिद्धियों को प्राप्त कर ले, वह तीनों लोकों में अजेय हो जाता है।
हमारे शास्त्रों में इन अष्ट सिद्धियों को इस श्लोक के माध्यम से दर्शाया गया है:
अणिमा महिमा चैव लघिमा गरिमा तथा।
प्राप्तिः प्राकाम्यमीशित्वं वशित्वं चाष्ट सिद्धयः।।
आइये, बजरंगबली की इन ८ सिद्धियों और रामायण काल में उनके उपयोग को विस्तार से समझते हैं:
अणिमा (सूक्ष्म रूप): इस सिद्धि से साधक अणु के समान सूक्ष्म रूप धारण कर सकता है। इसी शक्ति का प्रयोग कर हनुमान जी ने लंकिनी से बचकर लंका में प्रवेश किया था और सुरसा के मुख में जाकर वापस लौट आए थे।
महिमा (विशाल रूप): साधक अपना आकार कितना भी विशाल कर सकता है। लंका युद्ध में कुम्भकर्ण के समक्ष, लक्ष्मण जी के लिए पूरा संजीवनी पर्वत उठाते समय, और महाभारत में भीम का घमंड तोड़ते समय हनुमान जी ने इसी शक्ति से विराट रूप धरा था।
गरिमा (अत्यधिक भार): रूप सामान्य रहते हुए भी शरीर का भार किसी पर्वत के समान हो जाना। इसी सिद्धि के बल पर हनुमान जी ने अपनी पूंछ का भार इतना बढ़ा लिया था कि महाबली भीम भी उसे हिला नहीं सके थे।
लघिमा (भारहीनता): शरीर का भार रुई के समान हल्का कर लेना। अशोक वाटिका में सीता माता की खोज के दौरान, हनुमान जी इसी सिद्धि के बल पर एक वृक्ष के छोटे से पत्ते पर बैठ गए थे और पवन वेग से उड़ान भरते थे।
प्राप्ति (इच्छित प्राप्ति): अदृश्य होकर कहीं भी आना-जाना और पशु-पक्षियों की भाषा समझना। सीता माता की खोज के दौरान उन्होंने अनेक पशु-पक्षियों की भाषा समझ कर ही उनका मार्ग ज्ञात किया था।
प्राकाम्य (चिरंजीवी व अजर-अमर): इच्छित वस्तु का चिरकाल तक स्थायी रहना। इसी सिद्धि के कारण पवनपुत्र अजर-अमर हैं और कल्प के अंत तक भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन रहेंगे। वे स्वर्ग से पाताल तक कहीं भी जा सकते हैं।
ईशित्व (देवत्व और नेतृत्व): अद्वितीय नेतृत्व क्षमता और देवतातुल्य हो जाना। इसी बल पर उन्होंने सुग्रीव की रक्षा की, श्रीराम से उनकी मित्रता करवाई और पूरे लंका युद्ध में वानर सेना का सफल मार्गदर्शन किया।
वशित्व (इन्द्रिय निग्रह): अपनी इन्द्रियों और दूसरों को वश में रखना। इसी सिद्धि के कारण बजरंगबली परम जितेन्द्रिय और पूर्ण ब्रह्मचारी हैं, जिन्होंने अपने मन और इच्छाओं को पूरी तरह वश में किया हुआ है।
प्रभु श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी अष्ट सिद्धियों के स्वामी होकर भी सदैव विनम्र रहे। उनका जीवन हमें शक्ति के साथ-साथ संयम की शिक्षा देता है।
क्या आपको इससे पहले इन अष्ट सिद्धियों के इन अद्भुत प्रसंगों के बारे में पता था? कमेंट्स में जय श्री राम अवश्य लिखें! 👇🙏
. ॥ सियापति रामचंद्र की जय ॥
॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥ 🙏👇
. 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩
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#🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏