M P SINGH
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12 hours ago
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प्रेम भी एक तीर्थयात्रा जैसा होता है… जहाँ पहले मन को पुराने दुखों, शोर और बोझ से मुक्त करना पड़ता है। मैंने भी अब सब कुछ प्रभु को सौंप दिया है... मन का सारा कलुष, सारी बेचैनियाँ। अब जो शेष है, वो केवल शांत, निर्मल और शाश्वत प्रेम है। तूफ़ान आते हैं, लेकिन सच्चा प्रेम अंत में अरदास बनकर ही ठहरता है। 🙏 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️