#राष्ट्रीय_अपडेट चमोली जिले के देवाल बलाण गांव की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की बदहाल व्यवस्था की दर्दनाक सच्चाई है।
आज भी पहाड़ की माताओं-बहनों और बुजुर्गों को सड़क न होने के कारण डंडी-कंडी में अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है।
धामी सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों और इवेंट्स में व्यस्त है, लेकिन गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
सवाल यह है कि आखिर “विकास” सिर्फ पोस्टरों और भाषणों तक ही क्यों सीमित है?
जब बीमार महिला को 3 किलोमीटर पैदल डंडी-कंडी में ढोकर सड़क तक लाना पड़े, तो यह सिर्फ प्रशासन की लापरवाही नहीं बल्कि सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है।
उत्तराखंड के पहाड़ आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार सिर्फ घोषणाओं में व्यस्त है।
Aam Aadmi Party Uttarakhand मांग करती है कि—
• बलाण गांव सहित सभी दूरस्थ गांवों को जल्द सड़क सुविधा से जोड़ा जाए।
• पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए।
• सड़क निर्माण कार्यों में हो रही लापरवाही की जांच हो।
“डबल इंजन” के दावों के बीच अगर जनता को आज भी मरीजों को कंधों पर ढोना पड़े, तो यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
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