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. उमर बढाना, जीवत करना
कहते है हमारे भविष्य का लेखा जोखा हमारे जन्म के साथ ही शुरू हो जाते है। हमारा संचित कर्म पाप और पुन्य को मिलाकर हमारा भविष्य बनता है। इस काल के लोक मे कर्म आधार पर जिन्दगी चलती है। परन्तु यदि पुर्ण संत मिल जाता है तो पिछला लेखा जोखा खत्म कर अपने हिसाब से भाग्य बनाता है। पुर्ण संत मरे हुये व्यक्ति को पुन: जीवित करके उसकी उमर सौसाल बढा सकता है।
आज से लगभग 624 साल पहले कबीर साहेब जी इस मृतमण्डल काशी में सशरीर प्रकट हुए थे। तत्वज्ञान प्रचार के साथ अनेकों अद्वितीय चमत्कार भी किए जो केवल पूर्ण परमात्मा ही कर सकता है जैसे मुर्दे को जीवित करना, कटी गर्दन जोडकर पुन: जीवित करना, असाध्य रोग ठीक करना ऐसे-ऐसे हजारों चमत्कार परमेश्वर कबीर साहिब जी ने किए। तब उन्होंने अनेको मरे हुये को जीवित करके करिश्मे दिखाये थे। जैसे स्वामी रामानंद जी महाराज, सेऊ, कमाल व कमाली आदि उधाहरण है।
पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 में लिखा है कि ‘‘कविरंघारिरसि‘‘ अर्थात् (कविर्) कबीर (अंघारि) पाप का शत्रु (असि) है। फिर इसी पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में लिखा है कि परमात्मा (एनसः एनसः) अधर्म के अधर्म अर्थात् पापों के भी पाप घोर पाप को भी समाप्त कर देता है। मुर्दे को जीवित करना का वर्णन ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है।
सेऊ को जीवित करना
एक बार कबीर साहेब अपने दो सेवकों कमाल और फरीद के साथ अपने शिष्य सम्मन के घर गए। सम्मन वैसे तो बहुत निर्धन था, लेकिन उसकी आस्था कबीर साहेब में बहुत थी। सम्मन इतना निर्धन था कि बहुत बार तो उसके पास खाने के लिए खाना भी नहीं होता था, उस दिन भी कुछ ऐसा ही था। जब नेकी (सम्मन की पत्नी) ने देखा कि उधार मांगने पर भी कोई आटा उधार नहीं दे रहा तो उसने सेऊ और सम्मन को कहा कि तुम चोरी कर आओ, जब हमारे पास आटा होगा तो हम वापिस कर देंगे। जब सेऊ चोरी करने गया तो पकड़ा गया और सम्मन ने बदनामी के डर से सेऊ की गर्दन काट दी। सुबह होते ही नेकी ने भोजन तैयार किया और कबीर साहेब को एहसास तक नहीं होने दिया कि सेऊ मर चुका है। कबीर साहेब तो परमात्मा थे उन्होंने सिर्फ इतना कहा था
आओ सेऊ जीम लो, यह प्रसाद प्रेम।
शीश कटत हैं चोरों के, साधों के नित्य क्षेम।।
इतना कहते ही सेऊ आ गया और खाना खाने लगा।
स्वामी रामानंद को जीवित करना
जब सिकंदर लोधी के हाथों रामानंद का कत्ल हो गया तो सिकंदर लोधी बहुत उदास हो गया और कबीर साहेब के चरणों में पड़कर रोने लगा। कबीर जी कुटिया के अंदर गए और केवल इतना कहा था कि उठो गुरुदेव आरती का समय हो गया, उसी वक़्त रामानंद जी का शीश धड़ पर जुड़ गया। यह लीला देखकर सिकंदर लोधी और बाकी सब हैरान रह गए।
दिल्ली के सम्राट सिकन्दर लोधी ने कबीर साहिब जी के शिष्य बन गये थे। कबीर साहिब जी की बढ़ती महिमा से परेशान बादशाह सिकन्दर लोदी के धार्मिक पीर शेखतकी ने सिकन्दर से कहा कि इस कबीर काफिर को साथ किसलिए रखा है? सिकंदर ने कहा कि ये तो भगवान है। शेखतकी ने कहा कि अच्छा अल्लाह अब आकार में आने लग गया। अल्लाह कैसे है? सिकंदर ने कहा कि पहले तो अल्लाह ऐसे कि मेरा रोग ऐसा था कि किसी से भी ठीक नहीं हो पा रहा था। इस कबीर प्रभु ने हाथ ही लगाया था मैं स्वस्थ हो गया।
शेखतकी ने कहा कि ये जादूगर होते हैं। सिकंदर ने फिर कहा दूसरा भगवान ऐसे है कि मैंने उनके गुरुदेव का सिर काट दिया था और उन्होंने उसे मेरी आँखों के सामने तुरंत जीवित कर दिया। शेखतकी ने कहा कि अगर यह कबीर अल्लाह है तो मैं इसकी परीक्षा लूँगा। यदि कबीर जी मेरे सामने कोई मुर्दा जीवित करे तो इसे अल्लाह मान लूँगा। कबीर साहेब से प्रार्थना हुई तो कबीर साहेब ने कहा ठीक है शेख तकी ढूँढ़ ले कोई मुर्दा।
सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने कहा कि वह आ रहा है मुर्दा, इसे जिन्दा कर दो। कबीर साहेब ने कहा पहले आप प्रयत्न करो, कहीं फिर पीछे नम्बर बनाओ। उपस्थित मन्त्रियों तथा सैनिकों ने कहा कि पीर जी आप कोशिश करके देख लो।
शेखतकी जन्त्र- जाप करता रहा। इतने में वह मुर्दा तीन फलांग आगे चला गया। कहा कि कहीं मुर्दे जीवित होते हैं? मुर्दे तो कयामत के समय ही जीवित होते हैं। कबीर साहेब बोले महात्मा जी आप बैठ जाओ, शान्ति करो। कबीर साहेब ने उस मुर्दे को हाथ से वापिस आने का संकेत किया। बारह वर्षीय बच्चे का मृत शरीर दरिया के पानी के बहाव के विपरित चलकर कबीर जी के सामने आकर रूक गया।
कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। कबीर साहेब ने इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया। कबीर साहेब के चरणों में दण्डवत् प्रणाम किया।
सर्व उपस्थित जनों ने कहा कि कबीर साहेब ने तो कमाल कर दिया। उस लड़के का नाम कमाल रख दिया। लड़के को अपने साथ रखा। अपने बच्चे की तरह पालन पोषण किया और नाम दिया। सभी को पता चला कि यह लड़का जो इनके साथ है यह परमेश्वर कबीर साहेब ने जीवित किया है। दूर तक बात फैल गई। शेखतकी की तो माँ सी मर गई सोचा यह कबीर अच्छा दुश्मन हुआ। इसकी तो और ज्यादा महिमा हो गई।
शेखतकी की इर्ष्या बढ़ती ही चली गई। उसकी तेरह वर्षीय लड़की को मृत्यु पश्चात् कब्र में जमीन में दबा रखा था। शेखतकी ने कहा यदि कबीर मेरी लड़की को जो कब्र में दफना रखी है। अगर उसको जीवित करेगा तो मैं इसे अल्लाह मान लूँगा।
पूज्य कबीर साहेब से प्रार्थना हुई।कबीर साहेब ने सोचा यह नादान आत्मा ऐसे ही मान जाए।क्योंकि ये सभी जीवात्माऐं कबीर साहेब के बच्चे हैं। यह तो काल ने धर्म का हमारे ऊपर कवर चढ़ा रखा है। एक दूसरे के दुश्मन बना रखे हैं।
शेखतकी ने कहा कि यदि मेरी लड़की को जीवित कर दे तो हम इस कबीर को अल्लाह स्वीकार कर लेंगे और सभी जगह ढिंढ़ोरा पिटवा दूँगा कि यह कबीर जी भगवान है। कबीर साहेब ने कहा कि ठीक है। वह दिन निश्चित हुआ। कबीर साहेब ने कहा कि सभी जगह सूचना दे दो, कहीं फिर किसी को शंका न रह जाए। हजारों की संख्या में वहाँ पर भक्त आत्मा दर्शनार्थ एकत्रित हुई। कबीर साहेब ने कब्र खुदवाई। उसमें एक बारह-तेरह वर्ष की लड़की का शव रखा हुआ था।
कबीर साहेब ने शेखतकी से कहा कि पहले आप जीवित कर लो। सभी उपस्थित जनों ने कहा है कि महाराज जी यदि इसके पास कोई ऐसी शक्ति होती तो अपने बच्चे को कौन मरने देता है? हे दीन दयाल आप कृपा करो। पूज्य कबीर परमेश्वर ने कहा कि हे शेखतकी की लड़की जीवित हो जा। तीन बार कहा लेकिन लड़की जीवित नहीं हुई। शेखतकी ने तो भंगड़ा पा दिया। नाचे कूदे कि देखा न पाखण्डी का पाखंड पकड़ा गया। कबीर साहेब उसको नचाना चाहते थे कि इसको नाचने दे।
कबीर, राज तजना सहज है, सहज त्रिया का नेह।
मान बड़ाई ईर्ष्या, दुर्लभ तजना येह।।
मान-बड़ाई, ईर्ष्या का रोग बहुत भयानक है। अपनी लड़की के जीवित न होने का दुःख नहीं, कबीर साहेब की पराजय की खुशी मना रहा था। कबीर साहेब ने कहा कि बैठ जाओ महात्मा जी, शान्ति रखो। कबीर साहेब ने आदेश दिया कि हे जीवात्मा जहाँ भी है कबीर आदेश से इस शव में प्रवेश करो और बाहर आओ।
कबीर साहेब का कहना ही था कि इतने में शव में कम्पन हुआ और वह लड़की जीवित होकर बाहर आई, कबीर साहेब के चरणों में दण्डवत् प्रणाम किया। उस लड़की ने डेढ घण्टे तक कबीर साहेब की कृपा से प्रवचन किए, कहा! हे भोली जनता ये भगवान आए हुए हैं। पूर्ण ब्रह्म अन्नत कोटि ब्रह्माण्ड के परमेश्वर हैं। क्या तुम इसको एक मामूली जुलाहा मान रहे हो। हे भूले-भटके प्राणियो! ये आपके सामने स्वयं परमेश्वर आए हैं। इनके चरणों में गिरकर अपने जन्म-मरण का दीर्घ रोग कटवाओ और सतलोक चलो। जहाँ पर जाने के बाद जीवात्मा जन्म मरण के चक्कर से बच जाती है। कमाली ने बताया कि इस काल के जाल से बन्दी छोड़ कबीर साहेब के बिना कोई नहीं छुटवा सकता।
कबीर साहेब ने कहा कि बेटी अपने पिता के साथ जाओ। वह लड़की बोली मेरे वास्तविक पिता तो आप हैं। यह तो नकली पिता है। इसने तो मैं मिट्टी में दबा दी थी। मेरा और इसका हिसाब बराबर हो चुका है। सभी उपस्थित व्यक्तियों ने कहा कि कबीर परमेश्वर ने कमाल कर दिया। कबीर साहेब ने लड़की का नाम कमाली रख दिया और अपनी बेटी की तरह रखा और नाम दिया। उपस्थित व्यक्तियों ने हजारों की संख्या में कबीर परमेश्वर से उपदेश ग्रहण किया। कबीर ही पूर्ण परमात्मा जो मुर्दे को जीवित कर दे। ऐसी लीला कबीर परमेश्वर के अतिरिक्त कोई नहीं कर सकता।
कबीर साहिब ही पूर्ण परमात्मा है और परमात्मा ही ऐसे अद्वितीय अद्भुत चमत्कार कर सकते हैं। वे प्रारब्ध/भाग्य के दुख रोग को भी समाप्त कर सकते हैं जो कोई नहीं कर सकता। राम कृष्ण जी ने तो केवल निर्धारित चमत्कार किए। कबीर साहिब ने मृतकों को भी जीवित किया और प्रारब्ध को टाला।
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