Rani Chavan
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9 days ago
शनाया को इस हाल में देखकर कामिनी जी चौंक गईं। उन्होंने चाय का कप मेज़ पर रखा और चिंता से पूछा,"शनाया? क्या हुआ बेटा? तुम इस तरह रो क्यों रही हो? और शौर्य कहाँ है?" ​शनाया ने मौक़ा पाकर तुरंत कामिनी जी के घुटनों के पास बैठकर उनके हाथ थाम लिए। उसकी आँखों से मगरमच्छ के आँसू बहने लगे.. "आंटी. सब बर्बाद हो गया! मैं तो बस आपकी वापसी का ही इंतज़ार कर रही थी। अगर आप कुछ दिन और नहीं आतीं, तो शौर्य... वो. वो हमारे हाथ से हमेशा के लिए निकल जाता!" ​"मतलब.? साफ-साफ कहो शनाया! क्या बात है? शौर्य को क्या हुआ है?" कामिनी जी की आवाज़ में कड़कपन आ गया। ​"आंटी. पिछले कुछ दिनो से शौर्य कुछ अलग ही बिहेव कर रहा है." कोई अदिति शर्मा नाम कीं लडकी है, उसके पीछे पागल है वो!" "कक्क्या.? क्या कहा शनाया तुने अदिती शर्मा.?" शनाया के मुहसे अदिति का नाम सुनते ही कामिनी जी के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया और वे सोफे से खड़ी हो गईं.. 'मतलब वो फटीचर लडकी फिरसे मेरे बेटे कीं जिंदगी में लौट आई है?' कामिनी जी के आखोसे मानो अंगार बरसने लगे.. "शनाया, तुम सच केह रही हो ना?" कामिनी जी ने शनाया को घुरते हुये पूछा.. ​"हा आंटी, मै सच केह रही हू.. उसे खुद शौर्य लेकर आया है, अपनी जिंदगी में.!" शनाया के आखोसे मानो खुन के आसू बेह रहे थे. "आंटी, आपको अंदाज़ा भी नहीं है कि शौर्य अदिति के पीछे किस हद तक पागल हो चुका है। अदिति जिस पुरानी कंपनी में मामूली सी नौकरी कर रही थी , शौर्य ने उस पूरी कंपनी को सिर्फ इसलिए खरीद लिया क्योंकि वो अदिती के साथ रेह सके, उसने वो घाटे में चल रही कंपनी को VERMAX AI में मर्ज कर दिया और अदिति को सीधे अपनी पर्सनल असिस्टेंट बना दिया!"शनाया कीं ये बात सुनकर ​कामिनी जी हक्की-बक्की होकर शनाया को देखती रहीं। उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच रहा था। ​"इतना ही नहीं आंटी." शनाया ने अपने गालों को छूते हुए रोते हुये कहा.. "कल ऑफिस की कैंटीन में जब मैंने और मेरी सहेलियों ने अदिति को उसकी औकात याद दिलानी चाही. तो शौर्य ने पूरे ऑफिस के सामने, हम तीनों को घुटनों के बल बैठकर अदिति के पैर पकड़कर माफ़ी मांगने पर मजबूर कर दिया!शौर्य ने धमकी दी है कि अगर किसी ने भी उसकी आदू की तरफ आँख उठाकर भी देखा, तो वो हमें दिल्ली से बाहर फेंक देगा!" ​"बस करो शनाया! बस करो!" कामिनी जी ने गुस्से में चिल्लाते हुए मेज़ पर रखा हुआ कांच का वास ज़ोर से ज़मीन पर दे मारा। कांच के टुकड़े पूरे फर्श पर बिखर गए, उनकी सांसें भी तेज़ चल रही थीं। ​कामिनी जी का पूरा बदन गुस्से से कांप रहा था। उनके दिमाग में पाँच साल पुराना वह मंज़र घूम गया, जब उन्होंने खुद अदिति को कसम देकर, रोते-गिड़गिड़ाते हुए शौर्य की ज़िंदगी से हमेशा के लिए दूर चले जाने पर मजबूर किया था। ​ ​"पाँच साल पहले जिस लड़की को मैंने कसम देकर शौर्य की लाइफ से लात मारकर बाहर निकाला था... वो फिर से मेरे बेटे पर अपना जाल बिछा रही है? शौर्य उसके लिए इस हद तक गिर गया कि उसने अपनी माँ की पसंद का तमाशा बना दिया?!" कामिनी जी की आँखों से अंगारे बरस रहे थे। ​"मतलब आंटी आप भी उसे जाणती है..?" शनायाने हैरानी से पूछा.. "हा बहोत अच्छे से जाणती हू मै उसे..!!" कामिनी जी ने दात पर दात भीचते हुये कहा.. और यहा शनाया कीं आखे फटी कीं फटी रेह गई.. "मतलब, अब आप भी मेरी मम्मी से किया हुवा वादा तोड देगी..!" शनायाने धिमी आवाज में कामिनी जी कीं तरफ देखकर पूछा.. "ऐसा कभी नहीं होगा शनाया... मेरी बहू तो तुम ही बनोगी..!!" कामिनी जी कीं ये बात सुनकर शनाया कीं जान में जान आई.. "और आंटी, मैने उस फटीचर अदिती कीं इन्फॉर्मशन निकाली तब मुझे पता चला... उसकी तो चार साल कीं एक छोटी बच्ची भी है...!!" "क्या......????" कामिनी जी कीं आवाज पुरी हॉल में गुंजी.. अब तो गुस्सेसे उनके हात पैर कापने लगे.. "हा आंटी, और इस वक्त शौर्य दिल्ली में नहीं है। वो तो एक बिज़नेस डील के बहाने अदिति को अपने साथ लेकर मुंबई गया है.!" शनाया कीं ये सब बाते सुनकर कामिनी जी सुन पड गई, उन्हे अब लग रहा था बेटा आपने हात से गया.. उपर से अदिती को चार साल कीं बच्ची है ये बात सुनकर उनका तो मानो गला ही सुक गया.. ​"शनाया... शौर्य को वापस आने दो... फिर मैं उस अदिति को देखती हूँ! उसे फिर से उसकी औकात दिखानी पड़ेगी...!" कामिनी जी ने अपनी मुट्ठियाँ भींचते हुए बेहद तीखी और जहरीली आवाज़ में कहा। उनके चेहरे पर एक खूंखार और कड़ा भाव आ चुका था। ​शनाया के चेहरे पर एक कुटिल और दुष्ट मुस्कान तैर गई। ########## ​उधर दिल्ली में जहाँ अदिति के खिलाफ नफ़रत का चक्रव्यूह रचा जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ सपनों के शहर मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शौर्य की फ्लाइट लैंड कर चुकी थी। ​एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही मुंबई की हल्की सी उमस और समंदर की हवाओं ने उनका स्वागत किया। शौर्य ने पहले से ही अपनी कंपनी की तरफ से एक लग्जरी एसयूवी कार का इंतज़ाम करवा के रखा था। शौर्य ने खुद आगे बढ़कर पिहू को गोद में लिया और उसे कार की फ्रंट सीट पर बैठाया। अदिति चुपचाप पीछे की सीट पर जाकर बैठ गई। पूरे सफर के दौरान अदिति का मन रह-रहकर दिल्ली की तरफ भाग रहा था, उसे एक अजीब सी घबराहट महसूस हो रही थी। ​"मम्मा देखो! यहाँ कितनी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स हैं! और वो देखो, समंदर!" पिहू खिड़की के बाहर मरीन ड्राइव का खूबसूरत नज़ारा देखकर खुशी से कार की सीट पर ही उछलने लगी। शौर्य ने रियर-व्यू मिरर में अदिति को देखा, जो गुमसुम सी खिड़की के बाहर देख रही थी। "अदिति... हम मुंबई आ चुके हैं। कम से कम अब तो अपना सारा टेंशन भूल जाओ और थोड़ा मुस्कुराओ," शौर्य ने हल्की सी शरारत भरी आवाज़ में कहा। ​"मैं ठीक हूँ सर..।" अदिति ने शौर्य की नज़रों से नज़रें चुराते हुए कहा... और चुपचाप फिर से खिड़की के बाहर देखने लगी। ​वह मन ही मन सोचने लगी.. 'मैं यहाँ तो आ गई शौर्य... लेकिन मेरा दिल दिल्ली में ही छूटा हुआ है। मुझे तो बस मेरी छोटी की चिंता खाए जा रही है। कल संडे है... हर संडे मैं उससे मिलने जाती हूँ, लेकिन इस बार इस ट्रिप की वजह से मैं उसके पास नहीं जा पाऊँगी। वैसे तो... मेरी उस हालत में बैठी छोटी को मेरे आने या न आने से अब कोई फर्क नहीं पड़ता... लेकिन मैं? मैं अपनी छोटी को देखे बिना एक पल भी कैसे रहूँगी, ये मेरा दिल ही जानता है...' ​​To be continued... https://pratilipi.app.link/dVuu8FULf4b इस 👆 लिंक पर क्लिक करके पुरी कहाणी प्रतिलिपी अँप पर पढीये 🤗 #✍🏽 माझ्या लेखणीतून #✍मराठी साहित्य #💫माझी कला #🌹प्रेमरंग #📚मराठी रोमांचक कथा🧐