अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की स्थापना तिथि के उपलक्ष्य में हर साल 30 जून को अंतर्राष्ट्रीय संसदवाद दिवस (International Day of Parliamentarism) के रूप में मनाया जाता है।
इस वर्ष के उत्सव का विषय 'ग्रह के लिए संसद' है।
आईपीयू की स्थापना लोकतांत्रिक शासन को बढ़ावा देने, जवाबदेही को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय संसदों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करने के महान उद्देश्य के साथ की गई थी।
2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव द्वारा स्थापित यह विशेष दिन, पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में दुनिया भर में संसदों द्वारा की गई प्रगति को प्रतिबिंबित करने के अवसर के रूप में कार्य करता है। 1899 में अंतर-संसदीय संघ की स्थापना के बाद संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय संसदवाद दिवस मनाया गया था।
इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के माध्यम से 2018 में इस दिन को आधिकारिक तौर पर नामित किया गया था। संसद का मजबूत होना लोकतंत्र की आधारशिला होती है। संसद ही देश के लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है। संसद सदन में चर्चा के बाद कानून को पारित करती है और कानूनों और नीतियों को लागू करने के लिए बजट का आवंटन भी करती है। संसद ही सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह भी बनाती है। संसद यह भी सुनिश्चित करने का काम करती है कि जो भी नीतियां संसद या सरकार द्वारा बनाई जाती हैं उससे सभी देशवासियों को लाभ मिलें विशेषकर समाज के वंचित वर्ग के लोगों को वो तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ मिलें जो उनके नाम पर बनाई जाती हैं। भारतीय लोकतंत्र में संसद जनता की सर्वोच्च संस्था है। इसी के माध्यम से आम लोगों की संप्रभुता को अभिव्यक्ति मिलती है। संसद ही इस बात का प्रमाण है कि हमारी राजनीतिक व्यवस्था में जनता सबसे ऊपर है,जनमत सर्वोपरि है। संसदीय शब्द का अर्थ ही ऐसी लोकतंत्रात्मक राजनीतिक व्यवस्था है जहां सर्वोच्च शक्ति जनता के प्रतिनिधियों के उस निकाय में निहित है जिसे हम संसद कहते हैं। भारत के संविधान के अनुसार संघीय विधानमंडल को संसद कहा गया है। संसद ही वह धुरी है, जो देश के शासन की नींव है। भारतीय संसद राष्ट्रपति और दोनों सदनों राज्य सभा और लोक सभा से मिलकर बनी है। संसद की इसी महत्ता को समझते हुए हर साल 30 जून को अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस मनाया जाता है। 30 जून को 1889 में अंतर-संसदीय संघ की स्थापना हुई थी और इसी दिन को साल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस मनाने का फैसला एक प्रस्ताव के माध्यम से किया। अंतर-संसदीय संघ का उद्देश्य पुरी दुनिया में शांति एवं सहयोग के साथ संसदीय संवाद को कायम करते हुए लोकतंत्र को मजबूत बनाना है। अंतर-संसदीय संघ अपने इसी लक्ष्य की प्राप्त करने के लिए सभी देशों की संसद तथा सांसदों के बीच समन्वय और अनुभवों के आदान प्रदान को प्रोत्साहित करता है। अंतर-संसदीय संघ मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन में योगदान देने के साथ ही प्रतिनिधि संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा विकास में भी अपना योगदान देता रहता है। दुनिया के सभी देशों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को एक ही छत के नीचे लाने की पहल 1870-80 के दशक में शुरू हुई।
#शुभ कामनाएँ 🙏