sn vyas
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7 hours ago
#शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #👉 लोगों के लिए सीख👈 `नाहं भवद्भ्यां विगतोरुभूम्ना–` `विश्वेश्वराज्ञापितुमर्ह्य ईशः ।` `आत्मा हि वां वेद स मे ययोर्वां` `शिक्षार्थमेवात्र भुवि द्विजन्म ॥` [ `श्रीमद्भागवत १०.८०.३३ - सुदामा-प्रसंग` ] `अर्थात 👉🏻 श्रीकृष्ण सुदामा से कहते हैं – मैं सर्वेश्वर होते हुए भी आप दोनों - गुरु सान्दीपनि के - आज्ञा-पालन में ही रहा । मैं आत्मा हूँ , सब जानता हूँ , तथापि लोक-शिक्षा हेतु मैंने गुरु-गृह में द्विजत्व ग्रहण किया ।` `तत्त्व 👉🏻 जब स्वयं भगवान गुरु के बिना लीला नहीं करते , तो जीव की क्या गति❔ गुरु-सेवा ईश्वर का भी धर्म है ।` `श्लोक का मर्म –` `१. "विश्वेश्वराज्ञापितुमर्ह्य ईशः" –जो तीनों लोकों का स्वामी है , वह भी गुरु की आज्ञा माँगने योग्य है ।` `२. "शिक्षार्थमेवात्र भुवि द्विजन्म" – भगवान को शिक्षा की आवश्यकता नहीं – किन्तु लोक को "गुरु-बिना ज्ञान नहीं" यह सिखाने स्वयं गुरुकुल गए ।` `सार – जिस मर्यादा को भगवान स्वयं तोड़ते नहीं , उस मर्यादा को तोड़कर मोक्ष चाहना "अहंकार" है , "साधना" नहीं ।` `चित्र का तत्त्व-दर्शन –` `चित्र में वही "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः" साकार है –` `१. वटवृक्ष – अक्षयवट - सनातन गुरु-परम्परा का प्रतीक । दक्षिणामूर्ति शिव वट-वृक्ष के नीचे मौन-उपदेश देते हैं ।` `२. त्रिदेव एक वृक्ष में – ब्रह्मा - सृजन का ज्ञान , विष्णु - पालन का धर्म ,एवं शिव - संहार का वैराग्य – तीनों ही गुरु-रूप ।` `३. पत्तों पर देवता – "गुरुमण्डल-रूपिणी" श्रीविद्या – समस्त देवता गुरु-शरीर में वास करते हैं ।` `४. नीचे शिवलिंग-पूजन – गुरु अर्थात साक्षात् शिव – गुरु-पूजा ही शिव-पूजा है ।` `५. पिता-पुत्र का प्रणाम – गुरु-परम्परा पीढ़ी से चलती है – "गुरोरनुग्रहेणैव पुमान् पूर्णः प्रजायते ।"` `यह दिवस ,आप समस्त हेतु गुरु-बोध का दीपक बने –"गुरुबिन भवनिधि तरइ न कोई" - उपरोक्त श्लोक तथा चित्र दोनों उसी के साक्षी हैं ।` `गुरुकृपा हि केवलं शिष्यस्य परं मंगलम्🚩` `🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®`