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#किसानमजदूरबचेगा_तभी_देशबचेगा
. पहचानिये! कबीर साहेब ही पुर्ण परमात्मा है।
कबीर, एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घटघट में बैठा।
एक राम का सकल पसारा,एक राम त्रिभुवन से न्यारा।
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कबीर, त्रिदेव को सब कोई ध्यावे,चौथादेव को मर्म न पावे।
चौथा छाड़िजो पंचम ध्यावे,कहे कबीर सो हमही आवे।
कबीर, अटपटा ज्ञान कबीर का, झटपट समझ न आए।
झटपट समझ आए तो, सब खटपट ही मिट जाए।
कबीर, क का केवल नाम है, ब से बरन शरीर।
र से रम रहा संसार, ताका नाम कबीर।
कबीर, ना हमरे कोई मात-पिता, ना हमरे घर दासी।
जुलाहा सुत आन कहाया, जगत करै मेरी हाँसी।
कबीर, पानी से पैदा नहीं, श्वासा नहीं शरीर।
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर॥
कबीर, ना हम जन्मे गर्भ बसेरा, बालक होय दिखलाया।
काशी शहर जलज पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया॥
कबीर, सतयुग में सत्यसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा,
द्वापरमें करूणामय कहाया,कलयुग नामकबीर धराया
कबीर, अरबों तो ब्रह्मा गये, उन्नचास कोटि कन्हैया।
सात कोटि शम्भू गये, मोर एक पल नहीं पलैया
कबीर, नहीं बूढा नहीं बालक, नहीं कोई भाट भिखारी
कहै कबीर सुन हो गोरख, यह है उम्र हमारी।
कबीर, पाँच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानू ज्ञान अपारा।
सत्य स्वरूपी नाम साहिब का,सो है नाम हमारा।
कबीर, हाड- चाम लहू नहीं मेरे, जाने सत्यनाम उपासी।
तारनतरन अभय पद दाता, मैं हूँ कबीर अविनाशी
कबीर, अधर द्वीप भँवर गुफा, जहाँ निज वस्तु सारा।
ज्योतिस्वरूपी अलखनिरंजन,धरता ध्यान हमारा।
कबीर, जो बूझे सोई बावरा, पूछे उम्र हमारी।
असंख्य युग प्रलय गई, तब का ब्रह्मचारी।
गरीब, हम ही अलख अल्लाह है, कुतुब गौस और पीर।
गरीबदास खालिक धणी, हमरा नाम कबीर।
गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मण्ड का, एक रति नहीं भार।
सतगुरू पुरूष कबीर हैं, ये कुल के सृजनहार।
दादू, साचा शब्द कबीर का, सुनकर लागै आग।
अज्ञानी सो जल जल मरे, ज्ञानी जाए जाग।
दादू, जिन मोकू निज नाम दिया, सोई सतगुरू हमार।
दादू दूसरा कोई नहीं, वो कबीर सृजनहार।
Farmers Savior SantRampalJi