Mukesh Sharma
399 views
10 hours ago
*इडली... गरम इडली... एक रुपया...* *सुबह के 3 बजे। चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन।* प्लेटफॉर्म पर सब सो रहे हैं। बीचि में एक बुज़ुर्ग बैठे हैं—78 साल के। सफेद धोती-कुर्ता। हाथ में बांस की टोकरी। टोकरी में भाप उड़ाती इडलियां भरी हैं। "इडली... गरम इडली... एक रुपया... बस एक रुपया..." कोई नहीं खरीदता। 2026 है। एक रुपये में तो टॉफी भी नहीं मिलती—इडली कहाँ? लोग हँसते हैं, पागल कहते हैं। मेरा नाम अरविंद है। IT कंपनी में काम करता हूँ। नाइट शिफ्ट के बाद घर लौट रहा था। AC कार। भूख लगी थी। लेकिन स्टेशन के स्टॉल पर इडली ₹50 की। मैंने बूढ़े दादा को देखा। टोकरी में करीब 100 इडली। एक भी ग्राहक नहीं। आँखें नम थीं। मैं उतरा। "दादाजी, एक रुपये की इडली? घाटा नहीं होता आपको?" वो मुस्कुराए। "बेटा, घाटा नहीं। मुनाफा है।" "कैसे दादाजी? चावल का दाम, गैस का दाम... एक इडली कम से कम ₹5 की पड़ती है। आप ₹1 में बेचते हो?" उन्होंने टोकरी बंद की। "तुझे एक कहानी सुनाता हूँ।" "1975। मैं 25 साल का था। रेलवे कुली। महीना ₹100 तनख्वाह। एक दिन भारी बारिश। काम नहीं। पैसे नहीं। 3 दिन का भूखा। स्टेशन की बेंच पर बेहोश हो गया।" "तभी एक औरत—वो प्लेटफॉर्म पर इडली बेचती थी। एक रुपये की। उसने मुझे उठाया, पानी छिड़का, 4 इडली खिलाईं। पैसे नहीं मांगे।" "मैं रो पड़ा... बोला मेरे पास पैसे नहीं। वो बोली— 'बेटा, मैं भी कभी भूखी रही थी। उस दिन किसी ने मुझे खिलाया था। मैंने कसम खाई थी: मरते दम तक एक रुपये में इडली बेचूंगी ताकि भूखे खा सकें। तू भी वादा कर—जब बड़ा हो जाए, किसी भूखे को ऐसे ही खिलाना।'" बूढ़े दादा ने आँखें पोंछीं। "वो 1995 में गुजर गईं। मरने से पहले मेरा हाथ पकड़कर बोलीं, 'वादा निभाएगा?' मैंने हाँ कहा।" "उसके बाद मैंने रेलवे के ठेके लिए। खूब कमाया। तीन घर। दो बच्चे। दोनों अमेरिका में। लेकिन 1995 से आज तक—हर सुबह 3 बजे—100 इडली। एक रुपया। इसी स्टेशन पर। 30 साल।" मेरे रोंगटे खड़े हो गए। "दादाजी... रोज़ ₹400 का घाटा। महीने का ₹12,000। साल का ₹1.5 लाख। 30 साल में... ₹45 लाख!" "बेटा, पैसे से घाटा है। दिल से मुनाफा है। 30 साल में—कितने लोगों को खिलाया? 10 लाख इडली। 10 लाख पेट। 10 लाख दुआएँ। उसकी कीमत कितने करोड़ की है?" तभी एक लड़का दौड़ता आया। फटी कमीज। करीब 12 साल का। "दादाजी... इडली... 3 दिन से खाया नहीं। माँ अस्पताल में। पैसे नहीं।" दादा ने पत्ते पर 4 इडली रखीं, चटनी डाली। "आराम से खा, बेटे।" लड़का खाया... और रो पड़ा। "कल पैसे दे दूँगा..." "जरूरत नहीं। जब तू बड़ा हो जाए, किसी और भूखे को खिलाना। बस। यही कीमत है।" लड़का उनके पैरों में गिर पड़ा। "वादा करता हूँ दादाजी। मैं भी एक रुपये में इडली बेचूँगा।" मैंने ₹1000 निकाले। "दादाजी, प्लीज़... मैं सारी इडली खरीद लूँगा।" वो मुस्कुराए। "ये एक आदमी को बेचने के लिए नहीं हैं। ये भूखों के लिए हैं। अगर तू भूखा है, एक इडली ले। एक रुपया रख दे। बस।" मैंने ₹1 रखा। एक इडली ली। वो ज़िंदगी का सबसे स्वादिष्ट खाना था। आँसुओं के साथ खाया। "दादाजी, एक बात पूछूँ?" "पूछ बेटा।" "आपके बच्चे मना नहीं करते... कि पैसे बर्बाद हो रहे हैं?" उन्होंने फोन निकाला। वीडियो कॉल। बेटा अमेरिका में। "अप्पा, इडली बेच दी? तबियत ठीक है? डॉक्टर ने क्या कहा?" "मैं ठीक हूँ। आज एक लड़का आया, कहानी सुनी।" उनके बेटे ने मुझे देखा और मुस्कुराया। "सर, धन्यवाद। प्लीज़ मेरे पिता का ध्यान रखना। हम हर महीने ₹50,000 भेजते हैं—इडली के लिए। ये उनकी इच्छा है। यही हमारा आशीर्वाद है। उनका वादा हमारा वादा है।" दादा ने कॉल काट दी। "देखा बेटा? मेरे बच्चों ने भी वादा लिया है। मेरे बाद भी ये टोकरी नहीं रुकेगी। एक रुपये की इडली नहीं रुकेगी।" आज 2026 है। बूढ़े दादा अब नहीं रहे। पिछले साल 79 की उम्र में गुजर गए। मरने से पहले मेरा हाथ पकड़ा: "बेटा, टोकरी संभालना। वादा निभाना।" अब, हर सुबह 3 बजे, चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन की उसी बेंच पर—मैं होता हूँ। टोकरी इडली से भरी। एक रुपया। मैंने IT की नौकरी नहीं छोड़ी। लेकिन हर सुबह 2 घंटे... इडली के लिए देता हूँ। मेरी कंपनी में 200 स्टाफ हैं। हर कोई महीने का ₹100 देता है। *"वन रुपी इडली ट्रस्ट।"* वो 12 साल का लड़का—गणेश—अब 12वीं में है। पढ़ता है... और शाम को मदद करने आता है। "अन्ना, मैंने भी वादा लिया है। बड़ा होकर मैं भी यही करूँगा।" --- *दोस्तों, पैसा कमाना बड़ी बात नहीं है। पैसे से पुण्य कमाना—वो बड़ी बात है।* अगर घर में बच्चे हैं, तो एक छोटी गुल्लक रखो। *"₹1 बॉक्स।"* उनसे कहो रोज़ ₹1 डालें। महीने के ₹30। उससे किसी भूखे को खाना खिलाओ। क्योंकि ₹30 शायद तुम्हारे लिए पिज़्ज़ा का एक कोना हो... लेकिन किसी और के लिए, वो 30 दिन का खाना हो सकता है। --- *वादा करो: कम से कम एक भूखे को खिलाओगे।* पैसा चला जाएगा। पुण्य रह जाएगा। टोकरी खाली हो सकती है... लेकिन दिल भरा रहेगा। जय श्रीराम #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी