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4 days ago
#gyan ganga #santrampal mahraj ji #GodNightWednesday #किसानमजदूरबचेगा_तभी_देशबचेगा . कबीर साहेब का अद्भुत ज्ञान आज तक हमने हमारे सभी धर्म गुरुओं से व लोकवेद के आधार से यही सुना है कि कबीर साहेब जी एक भक्त संत कवि या फिर एक आम इंसान थे। जबकि सच्चाई कुछ और ही है जो हमें आज पता चला है कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा सर्व सृष्टि रचनहार कुल मालिक हैं इस आवश्यक जानकारी से हम कोसों दूर रहे और अपने मनुष्य जीवन व्यर्थ करते रहे हमारे धर्म गुरुओं ने भी हमारे शास्त्रों को ठीक से नहीं समझा। कबीर साहेब जी 600 वर्ष पहले भारतवर्ष में काशी नगर में शिशु रुप में प्रकट हुए थे और सन् 1398 से 1518 तक 120 वर्ष तक अपनी लीला करके गए अपने द्वारा रची गई सृष्टि की जानकारी ठीक ठीक बताकर गये और अपना ज्ञान हम सभी जीवों के उद्धार हेतु बताकर गये। कबीर साहेब ने हमे अक्षर पुरुष, क्षर पुरुष और तीनों देवता की स्थिति का वर्णन इस वाणी के द्वारा समझाया है। कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार। तीनों देवा शाखा हैं, ये पात रूप संसार।। जिसका प्रमाण गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में यथार्थ मिलता है। कबीर परमेश्वर ने ही यथार्थ ज्ञान बताया कि ब्रह्मा विष्णु महेश की जन्म और मृत्यु होती है, ये अविनाशी नहीं हैं। यही प्रमाण श्रीमद्देवी भागवत पुराण, स्कंद 3, अध्याय 5 में है। कबीर परमेश्वर ने बताया कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की भी जन्म तथा मृत्यु होती है। इनकी माता दुर्गा तथा पिता काल (ब्रह्म) है। कबीर, मां अष्टंगी पिता निरंजन, ये जम दारुण वंशन अंजन। तीन पुत्र अष्टंगी जाए, ब्रह्मा विष्णु शिव नाम धराए।। हम सभी के मन में एक सवाल अवश्य घर करता रहा है कि आखिर हमारी जन्म मृत्यु क्यों और किसलिए होती हैं और इसके पीछे किसका हाथ है और इस जानकारी से भी कबीर साहेब ने ही हमें अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन। परमात्मा कबीर साहेब जी ने ही हमे बताया है कि संसार में करोड़ों नाम (मंत्र) हैं उनसे मुक्ति नहीं होती, सारनाम से ही मुक्ति होती है लेकिन उस मंत्र को कोई नहीं जानता। उस मंत्र को सिर्फ तत्वदर्शी संत ही बता सकता है। कबीर, कोटि नाम संसार में, इनसे मुक्ति ना होय। सारनाम मुक्ति का दाता, वाको जाने न कोय।। कबीर परमेश्वर जी ने गुरू और सतगुरू में भेद बताया तथा सच्चे गुरु के लक्षण बताए। सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।। कबीर साहेब जी ने तत्वज्ञान दिया कि मानव जीवन में सतगुरु बनाकर भक्ति करना परमावश्यक है। सच्चे गुरु की शरण में जाकर दीक्षा लेने से ही पूर्ण लाभ मिलेगा, अन्यथा मानव जीवन बर्बाद है। वर्तमान में पूर्ण सतगुरु केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं। उनसे सतभक्ति प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करें। Farmers Savior SantRampalJi