अंतरराष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस
68 वर्ष पहले सन 1953 में 29 मई के दिन सुबह 11.30 बजे न्यूजीलैंड के एडमंड हिलेरी और नेपाल के तेनजिंग नोर्गे ने 29 हजार 32 फीट ऊंचे एवरेस्ट के शिखर पर पहला कदम रखा था। बौद्ध परम्परा के अनुसार तेनजिंग ने पर्वत के शिखर पर मिठाईयां और बिस्किट बर्फ में दबाकर भगवान को प्रसाद चढ़ाया। संयुक्त राष्ट्र संघ, नेपाल और भारत के ध्वज के साथ तस्वीरें ली और नीचे की ओर प्रस्थान करने लगे। पर्वत के निचले हिस्से पर कुछ साथी एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे का इंतजार कर रहे थे। घने कोहरे के बीच जब उन्हें थके-हारे हिलेरी और नोर्गे आते हुए दिखे तो उन्हें लगा कि शायद वे दोनों पर्वत फतह करने में सफल हो गए हैं। अब उन्हें एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए दूसरा प्रयास करना होगा। लेकिन 4 दिन बाद यानी 2 जून को जब विश्व को इनके कीर्तिमान का पता पड़ा, तो दुनिया भर में इसे अविश्वसनीय उपलब्धि के तौर पर देखा गया। यही कारण है कि 29 मई को प्रत्येक वर्ष अंतरराष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस के रूप में मनाया जाता है।
28 मई को एडमंड और तेनजिंग ने चढ़ाई शुरू की। लेकिन बर्फीले तूफान और रात हो जाने की वजह से दोनों को अपनी चढ़ाई 27,900 फीट पर ही रोकनी पड़ी। सुबह के 9 बजे उन्होंने अपना सफर फिर से शुरू किया। कुछ ही दूरी एक 40 फीट ऊंची बफीर्ली चट्टान थी। रस्सी की मदद से एक दरार से होते हुए हिलेरी चट्टान की ऊंचाई पर पहुंचे। इसके बाद नोर्गे ने भी उसी रस्सी की मदद से ऊपर आए और दोनों ने 11 बजे शिखर पर पहुंचकर इतिहास रच दिया।
#शुभ कामनाएँ 🙏