❣️𝑲𝒖𝒎𝒂𝒓💞 𝑹𝒂𝒖𝒏𝒂𝒌💞 𝑲𝒂𝒔𝒉𝒚𝒂𝒑❣️
822 views
7 days ago
#✋भगवान भैरव🌸 🚩 महाभारत का अनसुना रहस्य: अर्जुन के रथ की ध्वजा पर क्यों विराजे थे वीर हनुमान? 🚩 क्या आपने कभी सोचा है कि महाभारत के भीषण महायुद्ध में पवनपुत्र हनुमान, अर्जुन के रथ की पताका (ध्वजा) पर क्यों विराजमान रहते थे? इसके पीछे 'आनंद रामायण' में वर्णित एक बेहद अद्भुत और रोचक कथा है! 🏹 अर्जुन का अहंकार और एक अनोखी चुनौती एक बार रामेश्वरम तीर्थ में सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन का मिलन रामभक्त हनुमान जी से हुआ। बातों-बातों में अर्जुन ने अहंकारवश कहा, "आपके स्वामी श्रीराम तो श्रेष्ठ धनुर्धर थे, फिर उन्हें समुद्र पार करने के लिए पत्थरों का सेतु बनवाने की क्या आवश्यकता थी? यदि मैं वहाँ होता, तो बाणों का ऐसा सेतु बना देता जिस पर से पूरी वानर सेना आसानी से पार चली जाती।" हनुमान जी ने मुस्कुराकर कहा, "असंभव! बाणों का सेतु वानरों का भार नहीं सह सकता था। यदि हमारा एक भी वानर उस पर चढ़ता, तो वह छिन्न-भिन्न हो जाता।" 🔥 अग्नि-परीक्षा की शर्त अर्जुन अपने कौशल पर अड़े रहे और उन्होंने पास के ही एक सरोवर पर अपने तीरों से एक मजबूत सेतु बना दिया। उन्होंने हनुमान जी को चुनौती दी— "यदि आपके चलने से यह सेतु टूट गया, तो मैं अग्नि में प्रवेश कर जाऊंगा, और यदि यह नहीं टूटा तो आपको अग्नि में प्रवेश करना होगा।" बजरंगबली ने चुनौती स्वीकार कर ली। 🐾 जब डगमगाया बाणों का सेतु प्रभु श्रीराम का स्मरण कर हनुमान जी ने अपना विराट रूप धारण किया। जैसे ही उन्होंने पुल पर पहला पग रखा— सेतु बुरी तरह डगमगाने लगा। दूसरा पग रखा— सेतु चरमरा उठा। और जैसे ही तीसरा पग रखा— सरोवर का जल अचानक रक्त (खून) से लाल हो गया! ✨ भगवान श्रीकृष्ण का प्रकटीकरण यह देखकर हनुमान जी तुरंत नीचे उतर आए और अपनी शर्त के अनुसार अर्जुन से अग्नि तैयार करने को कहा। जैसे ही वे अग्नि में कूदने वाले थे, भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए और बोले— "ठहरो!" श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए रहस्य खोला— "हे पवनपुत्र! जब आपने तीसरा पग रखा, तब मैं कछुआ बनकर इस बाणों के सेतु के नीचे लेटा हुआ था। यह सेतु तो आपके पहले ही पग में टूट जाता, यदि मैं नीचे से इसे सहारा न देता। सरोवर का जल मेरे ही रक्त से लाल हुआ है।" 🙏 प्रभु का आदेश और वरदान यह सुनकर हनुमान जी को अत्यंत ग्लानि हुई और उन्होंने प्रभु की पीठ पर पैर रखने के महान अपराध के लिए क्षमा मांगी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, "हे हनुमान! आप खिन्न न हों, यह सब मेरी ही इच्छा से हुआ है। अर्जुन को उसके धनुर्विद्या के अहंकार से मुक्त करना आवश्यक था। मेरी यह इच्छा है कि आप आने वाले महाभारत युद्ध में अर्जुन के रथ की ध्वजा पर स्थान ग्रहण करें और उसकी रक्षा करें।" यही कारण था कि द्वापर युग में महाभारत के महायुद्ध के दौरान श्री हनुमान अजेय ढाल बनकर अर्जुन के रथ की पताका पर विराजमान रहे! जय श्री कृष्ण! जय बजरंगबली! 🙏🌸 . 🪷।। राधे राधे ।।🪷 . !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🪔अधिक भानु सप्तमी🙏📿 #🚩जय श्रीराम🙏 #🌷शुभ रविवार #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/