Praveen Kumar Yadav
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17 hours ago
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के रचयिता एवं महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी की जयंती पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। कालजयी उपन्यासों के माध्यम से भारतीय साहित्य को समृद्ध करने वाले चट्टोपाध्याय जी का कृतित्व हम सभी के लिए सदैव वंदनीय रहेगा।हर बार जब "वंदे मातरम्" गाया जाता है, तो यह गीत हर भारतीय के मन में एक उम्मीद जगा जाता है! और यह याद दिलाता है कि हमारे देश की आज़ादी किन-किन संघर्षों से होकर गुज़री है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, जो दिल से एक राष्ट्रभक्त थे, उन्होंने क़ानून की पढ़ाई और सरकारी नौकरी (जेसोर जिले के डिप्टी कलेक्टर) करने के बाद अपने असली जुनून, लेखन को अपनाया। वह अपने पिता चंद्र चट्टोपाध्याय के नक्शेकदम पर चल रहे थे, जो मिदनापुर के डिप्टी कलेक्टर रह चुके थे। उन्होंने अपने प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में कई लेखों के साथ एक कविता भी शामिल की थी, उस कविता के बोल ही आज हमारे राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्" का हिस्सा हैं। महात्मा गांधी ने जुलाई 1939 में 'हरिजन' पत्रिका में लिखा था, "इस गीत की रचना कैसे और कब हुई, यह बात कोई मायने नहीं रखती। लेकिन बंगाल के बँटवारे के दौर में यह हिंदू और मुसलमान दोनों के लिए एक ज़बरदस्त आज़ादी का नारा बन चुका था। यह एक औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ़ विद्रोह की पुकार थी। जब मैं बच्चा था और न 'आनंदमठ' जानता था, न बंकिम को; तब भी 'वंदे मातरम्' ने मुझे भीतर तक छू लिया था। जब पहली बार यह गीत सुना, तो मंत्रमुग्ध हो गया। मेरे लिए यह गीत सबसे शुद्ध राष्ट्रभावना से जुड़ा था।" वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है, यह भारत की आज़ादी की जटिल लेकिन वीरगाथा जैसी लड़ाई का प्रतीक है। यह विरोध की वो आवाज़ है, जिसने पूरे देश को एक सूत्र में बांधा। आइए इसकी कहानी जानते हैं 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏 #constitution ##viral #MOTIVATIONAL #🌞 Good Morning🌞 #deshbhakti