sn vyas
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6 days ago
. . ॥ विजयते् श्रीबालकृष्ण प्रभु॥ सदा शान्त रहें, निर्विकार रहें, सम रहने की चेष्टा करें। जगत के खेल से अपने आपको प्रभावित न होने दें खेल को खेल ही समझे। फिर जीवन में और कुछ बढ़ाने की इच्छा होगी और न घटने पर उसका दुःख हो होगा। खेलाडुवृत्ति जीवन की समता को टिकाए रखती हैं। जय हो प्रभु.... #राधे राधे *रसिया कों नार बनाओ री रसिया कों* _*कटि लंहगा गल माल कंचुकी,*_ _*वाकों चुनरी शीश उढ़ाओ* *री, रसिया कों।।*_ .