खुद को ढूँढने की बस जद्दोजहद में हूँ,
कमाल ये है कि अब भी अपनी हद में हूँ।
सँभालनी है तो सँभालो तुम अपनी हुकूमत,
मैं मुसाफिर हूँ, सिर्फ रास्तों की जद में हूँ।
कोई ज़ंजीर मुझे बांध कर क्या रखेगी,
मैं परिंदा हूँ, कहाँ सरहद में हूँ।
वो समझते हैं कि मैं हार के चुप बैठा हूँ,
मैं तो बस अपनी ही एक ज़िद में हूँ।
वो जानते हैं कि मैं चीज़ क्या हूँ,
भले खाक पर हूँ, मगर मसनद में हूँ।
रिहाई की तमन्ना अब किसे है 'मुसाफिर',
मैं सदियों से ही अपनी ज़ात की क़ैद में हूँ।
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