दलित की पहचान वाल्मीकि कबीर रैदास के बिना असंभव --दर्शन 'रत्न' रावण
वीर शिरोमणि डॉ अम्बेडकर जब 22 प्रतिज्ञाएँ जोड़ कर तब बुद्ध धर्म या धम्म को अपनाते हैं !
तब हम क्यों नहीं ? ? ? ?
आदिकवि वाल्मीकि जो कहते हैं,"किसी खरे कुँए का पानी इसलिए मत पीते रहो कि वो तुम्हारे बुज़ुर्गों का लगाया हुआ है।" उन्हें और जो बेबाक कबीर कहते हैं, "जिन्दा बाप कोई न पूजे, मरे बाद पुजवाया। मुठ्ठी भर चावल लेके, कौवे को बाप बनाया।।"
इस तार्किक, अकाट्य व व्यावहारिक दर्शन को जोड़ कर अम्बेडकरवाद को क्यों नहीं मान सकते !
दलित अस्तित्व की सम्मानजनक स्वीकृति हेतु !
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