गरीब, नारी नारी क्या करे, नारी निर्गुण नेश।
नारी सेती ऊपजे, ब्रह्मा विष्णु महेश ।।
संत गरीबदास जी कहते हैं कि लोग सामान्यतः नारी को केवल एक साधारण स्त्री समझते हैं, लेकिन वास्तव में वह 'निर्गुण' (ब्रह्म) का ही एक अंश स्वरूप है। वह कोई साधारण वस्तु नहीं बल्कि साक्षात् शक्ति दुर्गा का ही रूप है। वे आगे कहते हैं कि इसी शक्ति (आदिशक्ति दुर्गा/नारी स्वरूप) से ही इस सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, पालनहार विष्णु और संहारक महेश (शिव) की उत्पत्ति हुई है।
यहाँ 'नारी' शब्द का प्रयोग केवल स्त्री के लिए नहीं, बल्कि उस परम शक्ति दुर्गा (प्रकृति/माया/शक्ति) के लिए किया गया है, जिसके बिना सृष्टि का संचालन संभव नहीं है। कबीर साहिब जी संदेश दे रहे हैं कि नारी को तुच्छ न समझें, क्योंकि वह समस्त देवताओं और जगत की जननी है।
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