Vijay Dass
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12 days ago
#GodNightSaturday #महर्षिदयानंदसरस्वती_कीसच्चाई . कबीर साहेब जी की लीलाएं स्वामी रामानंद जी को कबीर साहेब प्रेमपूर्वक उत्तर दे रहे हैं । ए स्वामी सृष्टा मैं, सृष्टि हमारै तीर। दास गरीब अधर बसूं, अविगत सत्य कबीर। पौहमी धरणि आकाश में, मैं व्यापक सब ठौर। दास गरीब न दूसरा, हम समतुल नहीं और।। हम दासन के दास हैं, करता पुरुष करीम। दासगरीब अवधूत हम, हम ब्रह्मचारी सीम।। सुनि रामानंद राम हम, मैं बावन नरसिंह। दास गरीब कली कली, हमहीं से कृष्ण अभंग।। हमहीं से इंद्र कुबेर हैं, ब्रह्मा बिष्णु महेश। दास गरीब धर्म धव्जा, धरणि रसातल शेष।। सुनि स्वामी सति भाखहूँ, झूठ न हमरै रिंच। दास गरीब हम रूप बिन, और सकल प्रपंच।। गोता लाऊं स्वगर् सैं, फिरि पैठूं पाताल। गरीबदास ढूंढत फिरूं, हीरे माणिक लाल।। इस दरिया कंकर बहुत, लाल कहीं कहीं ठाव। गरीबदास माणिक चुगैं, हम मुरजीवा नांव।। मुरजीवा माणिक चुगैं, कंकर पत्थर डारि। दास गरीब डोरी अगम, उतरो शब्द अधार।। स्वामी रामानन्द जी ने कहाः- अरे कुजात! अथार्त् शुद्र! छोटा मुंह बड़ी बात, तू अपने आप को परमात्मा कहता है। तेरा शरीर हाड़-मांस व रक्त निमिर्त है। तू अपने आपको अविनाशी परमात्मा कहता है तेरा जुलाहे के घर जन्म है फिर भी अपने आप को अजन्मा अविनाशी कहता है तू कपटी बालक है। परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि ना मैं जन्मु ना मरूँ, ज्यों मैं आऊँ त्यों जाऊँ, गरीबदास सतगुरु भेद से लखो हमारा ढांव।। सुन रामानन्द राम मैं, मुझसे ही बावन नृसिंह। दास गरीब युग-2 हम से ही हुए कृष्ण अभंग।। Visit Sa News Channel #sant ram pal ji maharaj #me follow