#जय श्री राम
कैसे लोगो से ज्ञान एवं भक्ति की बाते करना व्यर्थ एवम समय बर्वाद करना है, ये प्रभु राम के श्री मुख से सुनो🐦
🐦तुलसीदासजी-रामचरितमानस🐦
जब प्रभु राम वानर सेना सहित समुद्र किनारे तीन दिनों तक रुके हुए थे। श्रीराम ने समुद्र से प्रार्थना की थी कि वह वानर सेना को लंका तक पहुंचने के लिए मार्ग दें, लेकिन समुद्र ने श्रीराम के आग्रह को नहीं माना और इस प्रकार तीन दिन व्यतीत हो गए। तीन दिनों के बाद श्रीराम समुद्र पर क्रोधित हो गए और लक्ष्मण से कहा कि-
बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति।--श्रीराम क्रोधित होकर लक्ष्मण से कहते हैं ,भय बिना प्रीति नहीं होती है यानी बिना डर दिखाए कोई काम नहीं करता है।
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीती।
सहज कृपन सन सुंदर नीती। 🚩
श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं- हे लक्ष्मण। धनुष-बाण लेकर आओ, मैं अग्नि बाण से समुद्र को सूखा डालता हूं। किसी मूर्ख से विनय की बात नहीं करना चाहिए। कोई भी मूर्ख व्यक्ति दूसरों के आग्रह या प्रार्थना को समझता नहीं है, क्योंकि वह जड़ बुद्धि होता है। मूर्ख लोगों को डराकर ही उनसे काम करवाया जा सकता है।।
सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति।
सहज कृपन सन सुंदर नीति॥🚩
कुटिल के साथ न करें प्रेम से बात,,,,श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि जो व्यक्ति कुटिल स्वभाव वाला होता है, उससे प्रेम पूर्वक बात नहीं करना चाहिए। कुटिल व्यक्ति प्रेम के लायक नहीं होते हैं। ऐसे लोग सदैव दूसरों को कष्ट देने का ही प्रयास करते हैं। ये लोग स्वभाव से बेईमान होते हैं, भरोसेमंद नहीं होते हैं। अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को संकट में डाल सकते हैं। अत: कुटिल व्यक्ति से प्रेम पूर्वक बात नहीं करना चाहिए।
कंजूस से न करें दान की बात,,,जो लोग स्वभाव से ही कंजूस हैं, धन के लोभी हैं, उनसे उदारता की, किसी की मदद करने की, दान करने की बात नहीं करना चाहिए। कंजूस व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में धन का दान नहीं कर सकता है। कंजूस से ऐसी बात करने पर हमारा ही समय व्यर्थ होगा।
श्रीराम कहते हैं-
ममता रत सन ग्यान कहानी।
अति लोभी सन बिरति बखानी।।🚩
ममता में फंसे हुए व्यक्ति से न करें ज्ञान की बात
श्रीराम कहते हैं- ममता रत सन ग्यान कहानी। यानी जो लोग ममता में फंसे हुए हैं, उनसे ज्ञान की बात नहीं करना चाहिए। ममता के कारण व्यक्ति सही-गलत में भेद नहीं समझ पाता है।
अति लोभी से वैराग्य की बात,अति लोभी सन बिरति बखानी। यानी जो लोग बहुत अधिक लोभी हैं, उनका पूरा मोह धन में ही लगा रहता है। ऐसे लोग कभी भी वैरागी नहीं हो सकते हैं। सदैव धन के लोभ में फंसे रहते हैं। इनकी सोच धन से आगे बढ़ ही नहीं पाती है। अत: ऐसे लोगों से वैराग्य यानी धन का मोह छोड़ने की बात नहीं करना चाहिए।🚩
क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा।
ऊसर बीज बएँ फल जथा।।🚩
क्रोधी से शांति का बात,,,जो व्यक्ति गुस्से में है, उससे शांति की बात करना व्यर्थ है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति सब कुछ भूल जाता है। ऐसे समय में वह तुरंत शांत नहीं हो सकता है। जब तक क्रोध रहता है, व्यक्ति शांति से बात नहीं कर पाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अच्छी-बुरी बातों में भेद नहीं कर पाता है।
कामी से भगवान की बात,,,जो व्यक्ति कामी है यानी जिसकी भावनाएं वासना से भरी हुई है, उससे भगवान की बात करना व्यर्थ है। कामी व्यक्ति को हर जगह सिर्फ काम वासना ही दिखाई देती है। अति कामी व्यक्ति रिश्तों की और उम्र की मर्यादा को भी भूला देते हैं। अत: ऐसे लोगों से भगवान की बात नहीं करना चाहिए।
ऊसर बीज बएँ फल जथा।,,,इस पंक्ति में श्रीराम कहते हैं कि यहां बताए गए सभी व्यक्तियों से न करने योग्य बातें करेंगे तो कोई फल प्राप्त नहीं होगा। जिस प्रकार ऊसर यानी बंजर जमीन में बीज बोने पर बीज नष्ट हो जाते हैं, ठीक उसी प्रकार यहां बताए गए लोगों से सही बात करना व्यर्थ ही है।
अत: हमारे आसपास रहने वाले ऐसे लोगों से यहां बताई बातें करने से बचना चाहिए। यदि श्रीराम द्वारा बताई गई बातों का ध्यान नहीं रखा जाएगा तो हमारा ही समय व्यर्थ होगा और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ेगा।
🌹जय हो प्रभु राम की➖जय हो राजाराम की🌹
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�स जिन्ह के मन माहीं। तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं॥
तनु तिज तात जाहु मम धामा। देउँ काह तुम्ह पूरनकामा॥
भावार्थ:- जिनके मन में दूसरे का हित बसता है (समाया रहता है), उनके लिए जगत् में कुछ भी (कोई भी गति) तात! शरीर छोड़कर आप मेरे परम धाम में जाइए। मैं आपको क्या दूँ? आप तो पूर्णकाम हैं (सब कुछ पा चुके हैं)
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सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्याsभ्यासेन रक्ष्यते
मृज्यया रक्ष्यते रुपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते।।
धर्म का रक्षण सत्य से,विद्या का अभ्यास से, रूप का सफाई से और कुल का रक्षण आचरण करने से होता है।
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प्रकृति के अमर्यादित विषय-भोग ही चेतन आत्मा के प्रकाश का विस्तार रोक देते हैं /को ढक देते हैं क्योंकि विषय भोग प्रकृति से तामसिक एवं राजसिक होते हैं l एसे में आत्मा सुसुप्त अवस्था में चली जाती है और फिर पुनर्जन्म अधम योनि मे मिलता है l भले ही आत्मा स्वभाव से ही ज्ञानवान है, लेकिन माया के रजोगुणी/तमोगुणी भोगों के दूषित संग से आत्मा का प्रकाश ढक जाता है, जो केवल पाप कटने एवं भगवान की भक्ति करने से ही आत्मा फिर से अंतःकरण में प्रकाश देने लगती है,l
🌺🍀जय श्री राम, जय श्री महावीर हनुमान 🍀🌺