#काशी
🌿 काशी की दिव्य अन्नपूर्णा लीला: जहाँ अन्न ही ब्रह्म है 🌿
काशी… वह पावन भूमि जहाँ प्रत्येक कण में शिव का स्पंदन है और हर श्वास में मोक्ष का मधुर नाद गूँजता है।
गंगातट पर एक अलौकिक दृश्य साकार हुआ—स्वयं भगवान शिव और माता अन्नपूर्णा मानव रूप में विराजमान थे। उनके समक्ष निर्धन, भूखे और पीड़ित जन पंक्तिबद्ध थे, और वे दोनों अपने करकमलों से उन्हें अन्न प्रदान कर रहे थे।
पुराणों में वर्णित है कि एक समय काशी में भीषण अकाल पड़ा। अन्न के अभाव में जन-जीवन संकटग्रस्त हो गया। तब भगवान शिव ने जगत को यह संदेश देने हेतु कि “अन्न ही ब्रह्म है”, माता पार्वती को अन्नपूर्णा स्वरूप धारण करने का निर्देश दिया।
माता अन्नपूर्णा ने काशी में प्रकट होकर अन्न के भंडार खोल दिए। स्वयं भगवान शिव भी भिक्षुक बनकर उनके समक्ष खड़े हुए। यह दिव्य संकेत था कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं, जब तक उसमें करुणा और अन्न का समन्वय न हो।
इस दिव्य चित्र में वही अनुपम क्षण सजीव है—
जहाँ महादेव अपने हाथों से अन्न परोस रहे हैं और माता अन्नपूर्णा प्रेमपूर्वक करछुल से दाल वितरित कर रही हैं।
यह केवल भोजन नहीं, अपितु—
यह कृपा है, यह भक्ति है, यह मोक्ष का मार्ग है।
काशी की मान्यता है—
जो व्यक्ति यहाँ अन्नदान करता है, उसे स्वयं माता अन्नपूर्णा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके जीवन में कभी अभाव नहीं रहता।
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे।
ज्ञान वैराग्य सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥
जो साधक हृदय से माता अन्नपूर्णा का स्मरण करता है, उसके जीवन में केवल अन्न ही नहीं, अपितु शांति, संतोष और समृद्धि का भी अभाव नहीं रहता।
आज भी काशी के घाटों पर यह कथा पवन के साथ प्रवाहित होती है—
जहाँ हर भूखे के हाथ में प्रसाद है और हर आत्मा में शिव का निवास।
नमामीशमीशान 🙏