सुशील मेहता
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1 days ago
शनिश्चरी ज्येष्ठ अमावस्या ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को ज्येष्ठ अमावस्या मनाई जाती है. यह कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है. इसके बाद से शुक्ल पक्ष का प्रारंभ होता है. इस बार ज्येष्ठ अमावस्या और ज्येष्ठ दर्श अमावस्या दोनों एक साथ हैं. ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पवित्र ​नदियों में स्नान करने के बाद दान देने की परंपरा है. ऐसा करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. स्नान और दान से ​पितर प्रसन्न होते हैं और वे आशीर्वाद देते हैं। ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन प्रात:काल से ही स्नान और दान प्रारंभ हो जाता है. इस दिन आप सुबह पवित्र नदी में स्नान कर लें और उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. ऐसा करने से पुण्य लाभ होगा। घर में सुख-शांति- ज्येष्ठ अमावस्या पर प्रात: गंगा नदी में स्नान करें या घर पर गंगाजल मिले पानी से स्नान करें. उसके बाद हाथ में कुश और काले तिल लेकर पितरों को जल से तर्पण दें. ऐसा करने से पितर तृप्त होते हैं. कहते हैं इससे कई पीढ़ियों के पितरों को जल प्राप्त होता है और उनकी आत्मा संतुष्ट होती है. घर में खुशहाली आती है. सुखी गृहस्थी के लिए - ज्येष्ठ अमावस्या पर पीपल, बड़, आंवले, नीम का पौधा लगाने की परंपरा है. नियमित रूप से इन पौधों को लगाने के बाद सेवा करने से पितर खुश होते हैं. इन्हें घर या आसपास लगाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है. धन में वृद्धि - कहते हैं अमावस्या पर पूर्वज किसी भी रूप में धरती पर आते हैं. पितरों को प्रसन्न करने के लिए इस दिन ब्राह्मण को भोजन कराएं, साथ ही कौए, गाय, कुत्ते, चीटियों को भी खाना खिलाएं. इससे पितरों को भोजन प्राप्त होता है. धन में वृद्धि और तनाव से मुक्ति के लिए ये उपाय लाभकारी है. ग्रंथों में बताया गया है कि शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या शुभ फल देती है। इस तिथि पर तीर्थ स्नान और दान का कई गुना पुण्य फल मिलता है। अमावस्या शनि देव की जन्म तिथि भी है। इसलिए इस दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष खत्म होते हैं। इस दिन शनि देव की कृपा पाने के लिए व्रत रखना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाना चाहिए। ये शनैश्चरी अमावस्या खास इसलिए है क्योंकि शनि अपनी ही राशि यानी मकर में है। इस पर्व पर सुबह जल्दी नदी, सरोवर, पवित्र कुंड या तीर्थ में स्नान करना चाहिए। नहाने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इस दिन व्रत रखकर जहां तक संभव हो मौन रहना चाहिए। जरूरतमंद व भूखे व्यक्ति को भोजन जरूर कराएं। शनैश्चरी अमावस्या पर ऊनी कपड़े या कंबल का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से शनि दोष तो दूर होते हैं साथ ही जाने अनजाने में हुए पाप भी खत्म हो जाते हैं।शनैश्चरी अमावस्या के दिन भगवान शिव की आराधना करें। कहते हैं शनि ग्रह से शुभ फल पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।शनैश्चरी अमावस्या पर शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं। साथ ही ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें। यह उपाय शनि दोष को दूर करने में बेहद कारगर माना जाता है। शनैश्चरी अमावस्या पर बजरंगबली की पूजा जरूर करें। इस उपाय को करने से शनि से जुड़े दोष दूर होंगे। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना और हनुमान जी के मंदिर में प्रसाद चढ़ाना शनि दोष से मुक्ति पाने का कारगर उपाय है। #शुभ कामनाएँ 🙏