sn vyas
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1 days ago
#श्री हरि विष्णु 🌷 ॥ श्री विष्णु भक्तवत्सल स्तोत्र 🌷🌷 *(हिन्दी अर्थ सहित) ॥* *यह स्तोत्र भगवान विष्णु के भक्तवत्सल (भक्तों पर प्रेम करने वाले) स्वरूप का अत्यंत सुंदर स्तवन है।* *नियमित पाठ से संकट नाश, मन की शांति और भगवत् कृपा प्राप्त होती है।* (१) शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं उन भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ जो शांत स्वरूप वाले हैं, शेषनाग पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ है, देवताओं के ईश्वर हैं।* *जो सम्पूर्ण विश्व के आधार हैं, आकाश के समान व्यापक, मेघ के समान श्यामवर्ण और सुंदर अंगों वाले हैं।* *जो लक्ष्मीपति, कमल के समान नेत्र वाले और योगियों के ध्यान में प्राप्त होने वाले हैं, तथा संसार के भय को दूर करने वाले समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी हैं।* (२) दिव्यरूपं जगन्नाथं सर्वरक्षाकरं प्रभुम्। भक्तानां हृदिसंस्थितं विष्णुं वन्दे सनातनम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं उन सनातन भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ, जो दिव्य स्वरूप वाले, जगत के स्वामी, सबकी रक्षा करने वाले और भक्तों के हृदय में निवास करने वाले हैं।* (३) भक्तवत्सलं करुणासागरं सर्वलोकनमस्कृतम्। नारायणं जगन्नाथं वन्देऽहं सर्वकामदम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं भक्तों से प्रेम करने वाले, करुणा के सागर, सभी लोकों द्वारा पूजनीय, जगत के स्वामी नारायण को प्रणाम करता हूँ, जो सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं।* (४) अनन्तरूपं दयामयं भक्ताभीष्टप्रदायकम्। सर्वदुःखहरं देवं विष्णुं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं अनन्त रूप वाले, दयालु, भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण करने वाले, समस्त दुःखों का नाश करने वाले और जगत के गुरु भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ।* (५) दीनबन्धुं कृपासिन्धुं भक्तानुग्रहकारकम्। सर्वदुःखहरं देवं वन्दे विष्णुं जनार्दनम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं दीनों के मित्र, कृपा के सागर, भक्तों पर अनुग्रह करने वाले और सब दुःखों को दूर करने वाले जनार्दन विष्णु को प्रणाम करता हूँ।* (६) शरणागतवत्सलं देवं सर्वसंकटनाशनम्। अनाथनाथं विश्वेशं विष्णुं वन्दे पुनः पुनः ॥ 👉 अर्थ: *मैं बार-बार उन भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ जो शरण में आए भक्तों से प्रेम करने वाले, सभी संकटों का नाश करने वाले, अनाथों के नाथ और विश्व के ईश्वर हैं।* (७) पीताम्बरधरं देवं शङ्खचक्रगदाधरम्। भक्तरक्षाकरं विष्णुं वन्दे भक्तवत्सलम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं पीताम्बर धारण करने वाले, शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले, भक्तों की रक्षा करने वाले भक्तवत्सल भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ।* (८) गरुड़वाहनं देवं लक्ष्मीसमेतमच्युतम्। सर्वसिद्धिप्रदं शान्तं विष्णुं वन्दे जगत्पतिम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं गरुड़ पर आरूढ़, लक्ष्मी सहित विराजमान, अच्युत, शान्त और सभी सिद्धियाँ देने वाले जगत के स्वामी विष्णु को प्रणाम करता हूँ।* (९) अच्युतं केशवं रामं नारायणं कृष्णं दामोदरं वासुदेवं हरिम्। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥ 👉 अर्थ: *मैं अच्युत, केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर, माधव, गोपियों के प्रिय और जानकी के पति रामचन्द्र का भजन करता हूँ।* (१०) अनन्तं पुरुषोत्तमं आदिदेवं जगदाधारम्। परमब्रह्मस्वरूपं भक्तप्रियं मङ्गलं शाश्वतम्। तं वन्दे विष्णुं जगदीश्वरं विभुम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं अनन्त, पुरुषोत्तम, आदि देव, जगत के आधार, परम ब्रह्म स्वरूप, भक्तप्रिय, मंगलमय और शाश्वत भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ।* (११) नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्। देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥ 👉 अर्थ: *नारायण, श्रेष्ठ पुरुष (नर), देवी सरस्वती और व्यासजी को नमस्कार करके ही शुभ कार्य का आरम्भ करना चाहिए।* (१२) वेदवेद्यं जगन्नाथं ज्ञानरूपं सनातनम्। ध्यानगम्यं परं तत्त्वं विष्णुं वन्दे निरञ्जनम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं वेदों से जानने योग्य, जगत के स्वामी, ज्ञानस्वरूप, सनातन, ध्यान से प्राप्त होने वाले और निष्कलंक भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूँ।* (१३) सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥ 👉 अर्थ: *(भगवान कहते हैं) – सब धर्मों को त्यागकर केवल मेरी शरण में आओ, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो।* (१४) इति श्रीभगवद्वाणी भक्तानां हितकारिणी। श्रद्धया पठेन्नित्यं तस्य मोक्षो न संशयः ॥ 👉 अर्थ: *यह भगवान की वाणी भक्तों के कल्याण के लिए है। जो इसे श्रद्धा से प्रतिदिन पढ़ता है, उसे मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है।* (१५) भक्तानां हृदयावासं सर्वसंकटनाशनम्। अनन्तं सर्वलोकेशं वन्दे विष्णुं सनातनम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं उन सनातन विष्णु को प्रणाम करता हूँ जो भक्तों के हृदय में निवास करते हैं, सभी संकटों को दूर करते हैं और समस्त लोकों के स्वामी हैं।* (१६) शान्तिदं पुण्यदं नित्यं भक्ताभीष्टप्रदायकम्। सर्वमङ्गलदं देवं विष्णुं वन्दे करुणानिधिम् ॥ 👉 अर्थ: *मैं शांति देने वाले, पुण्य प्रदान करने वाले, भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण करने वाले और सभी मंगल देने वाले करुणानिधान विष्णु को प्रणाम करता हूँ।* (१७) जय विष्णु देवदेव जय भक्तवत्सल प्रभु। जय जगन्नाथ श्रीहरि रक्ष मां शरणागतम् ॥ 👉 अर्थ: *हे देवों के देव विष्णु! आपकी जय हो। हे भक्तवत्सल प्रभु! आपकी जय हो।* *हे जगन्नाथ श्रीहरि! मेरी रक्षा करें, मैं आपकी शरण में हूँ।* (१८) *त्वमेव माता च पिता त्वमेव,* *त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।* *त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥* 👉 अर्थ: *हे प्रभु! आप ही मेरे माता-पिता हैं, आप ही मेरे बन्धु और मित्र हैं।* *आप ही मेरी विद्या, धन और सब कुछ हैं — हे देव! आप ही मेरे सर्वस्व हैं।* 🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🙏🙏🙏🙏🙏