sn vyas
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8 days ago
भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा में **सावधानियों** का बहुत अधिक महत्व है। श्री हरि स्वभाव से अत्यंत शांत और दयालु हैं, लेकिन उनकी पूजा के नियम बहुत कड़े माने जाते हैं। यदि उनकी पूजा या व्रत में कुछ गलतियां हो जाएं, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। ## श्री हरि विष्णु की पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें श्री हरि विष्णु की आराधना करते समय निम्नलिखित बातों और नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए: ### 1. अक्षत (चावल) का प्रयोग वर्जित श्री हरि विष्णु की पूजा में कभी भी सफेद या साबुत चावल (अक्षत) सीधे अर्पित नहीं किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार विष्णु जी की पूजा में चावल चढ़ाना निषेध है। यदि चावल चढ़ाना बहुत जरूरी हो, तो उन्हें हल्दी से पीला करके ही अर्पित करना चाहिए। ### 2. तुलसी दल के बिना पूजा अधूरी भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। उनके किसी भी रूप की पूजा या उन्हें लगाया जाने वाला भोग तब तक स्वीकार नहीं होता, जब तक उसमें तुलसी का पत्ता (तुलसी दल) न रखा जाए। लेकिन ध्यान रहे कि रविवार, एकादशी और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। ### 3. शंख का विशेष महत्व श्री हरि की पूजा में शंख का होना अनिवार्य माना गया है। उन्हें शंख से जल अर्पित करना या पूजा के समय शंख बजाना अत्यंत शुभ होता है। परंतु ध्यान रखें कि भगवान विष्णु की पूजा में कभी भी **शंखचूड़ शंख** या ऐसा शंख जिससे किसी जीव की हत्या का दोष जुड़ा हो, उसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। ### 4. तामसिक भोजन और विचारों का त्याग जिस दिन भी श्री हरि का व्रत या विशेष पूजा (जैसे एकादशी या गुरुवार) हो, उस दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसी तामसिक चीजों का प्रवेश बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही मन में किसी के प्रति क्रोध, ईर्ष्या या कटु वचन नहीं लाने चाहिए। ### 5. फूलों का चयन श्री हरि को पीले रंग के फूल (जैसे गेंदा या पीला कमल) अत्यंत प्रिय हैं। उनकी पूजा में कभी भी अगस्त्य, माधवी या लोध के फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हमेशा ताजे और साफ फूलों का ही इस्तेमाल करें। #श्री हरि विष्णु