#जय श्री राम
"राम बाम दिसि जानकी, लखन दाहिनी ओर।
ध्यान सकल कल्यानमय, सुरतरु तुलसी तोर।।"
अर्थात:: *राम बाम दिसि जानकी* *भगवान राम के बाईं ओर (बाम दिसि) माता जानकी (सीता जी) विराजमान हैं। प्राचीन भारतीय परंपरा में, पत्नी को पति के बाईं ओर बैठना शुभ माना जाता है। यह अर्धांगिनी के रूप में सीता जी की महत्ता को दर्शाता है।
* "लखन दाहिनी ओर": भगवान राम के दाहिनी ओर (दाहिनी ओर) लक्ष्मण जी खड़े हैं। लक्ष्मण जी को राम के अनन्य सेवक और भाई के रूप में हमेशा उनके साथ रहने वाले के रूप में दर्शाया गया है।
* "ध्यान सकल कल्यानमय": यह तीनों (राम, जानकी, लक्ष्मण) का ध्यान करना, उनका स्मरण करना समस्त कल्याण (सकल कल्यानमय) को प्रदान करने वाला है। अर्थात, उनके इस स्वरूप का चिंतन करने से सभी प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में मंगल होता है।
* "सुरतरु तुलसी तोर": इस पंक्ति में तुलसीदास जी स्वयं को संबोधित करते हुए कहते हैं कि "हे तुलसी, यह स्वरूप तुम्हारे लिए कल्पवृक्ष (सुरतरु) के समान है।" कल्पवृक्ष स्वर्ग का एक पौराणिक वृक्ष है जो सभी इच्छाओं को पूरा करता है। तुलसीदास जी के लिए भगवान राम, सीता और लक्ष्मण का यह स्वरूप ही उनके लिए सब कुछ है, और इसी के ध्यान से उन्हें परम आनंद और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सारांश में:--- यह दोहा भगवान राम के परिवार के एक सुंदर और कल्याणकारी चित्र को प्रस्तुत करता है, जहां राम, सीता और लक्ष्मण का साथ होना ही परम मंगलकारी है। तुलसीदास जी इस स्वरूप को अपने लिए कल्पवृक्ष के समान मानते हैं, जिससे उनकी सभी आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती हैं। यह उनकी गहरी भक्ति और शरणागति को भी दर्शाता है
।। जय श्री राम, जय सियाराम 🙏।।